जानिए एमपी में कितनी बढ़े महिला अपहरण के मामले, क्या लड़कियां सुरक्षित नहीं
स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार साल 2021 के पहले चार महीनों में प्रदेश से 2,900 से अधिक महिलाओं और लड़कियों का अपहरण किया गया. यह आंकड़ा पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में लगभग 600 अधिक है. साल 2020 के पहले चार महीनों जनवरी से अप्रैल तक 2,300 महिलाओं और लड़कियों का अपहरण किया गया था, जो इस साल बढ़कर 2,957 हो गया. इसमें लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
कोरोना कर्फ्यू में नहीं थमी वारदात
21 अप्रैल से राज्य में ‘जनता कर्फ्यू’ लगा दिया गया था. हैरानी की बात ये है कि उसी महीने राज्य में 666 अपहरण हुए. पिछले साल भी 22 मार्च से मई 2020 तक देश में पूर्ण तालाबंदी की गई थी. लेकिन, अपहरण की घटनाएं जारी रहीं. राज्य में अप्रैल में 207 और मई में 381 महिलाओं और लड़कियों का अपहरण किया गया. साल 2020 में कुल 6,887 लड़कियों और महिलाओं का अपहरण किया गया. साल 2019 में यह आंकड़ा 9,812 था. जून के महीने में कर्फ्यू में ढील के बाद अपहरण की संख्या 624 तक पहुंच गई और उसके बाद यह बढ़ती रही. जबकि अपहरण की संख्या 2019 की तुलना में कम है. लेकिन यह संख्या अभी भी चिंता का विषय है.
ऑपरेशन मुस्कान से रिकवरी की कोशिश
साल 2020 में अपहृत व्यक्तियों में लगभग 73 प्रतिशत लड़कियां और शेष महिलाएं थीं. जानकारी के अनुसार पिछले 8 साल में 2013 से 2020 के बीच 67125 बच्चे लापता हुए हैं. इनमें बालिकाओं की संख्या 48389 है. इस हिसाब से 8 सालों में हर रोज 22 बच्चे प्रदेश से लापता हो रहे हैं. इनमें 30 फीसदी बच्चों की बरामदगी नहीं हो पाती. पुलिस इन मामलों में मानव तस्करी के एंगल से जांच करती है. आदिवासी बहुल जिले बैतूल, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, मंडला आदि से बच्चों के लापता होने की घटनाएं ज्यादा होती हैं. पिछले साल चलाए गए ऑपरेशन मुस्कान में प्रदेश के साथ गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, कर्नाटक, तेलंगाना, बंगाल और राजस्थान से बालिकाओं की बरामदगी हुई थी. CID लापता बच्चों की मॉनिटरिंग करती है.
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