जंतर-मंतर पर ‘किसान संसद’ का दूसरा दिन, कृषि मंत्री पर सवालों की बौछार


संसद में जारी मानसून सत्र के साथ-साथ जंतर मंतर पर आयोजित ‘किसान संसद’ शुक्रवार को दूसरे दिन भी चली। किसी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए अर्द्धसैनिक बल और पुलिसकर्मी प्रवेश द्वार पर भारी-भरकम अवरोधकों के साथ प्रदर्शन स्थल पर तैनात किए गए हैं। किसानों का विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।

किसानों ने ‘किसान संसद’ का आयोजन सदन अध्यक्ष हरदेव अर्शी, उपाध्यक्ष जगतार सिंह बाजवा और ‘कृषि मंत्री’ के साथ किया। किसान संसद में एक घंटे का प्रश्नकाल भी रखा गया था, जिसमें कृषि मंत्री पर सवालों की बौछार की गई, जिन्होंने केंद्र के नये कृषि कानूनों का बचाव करने की पुरजोर कोशिश की। मंत्री ने संसद को बताया कि कैसे पैर फैलाती कोविड वैश्विक महामारी के बीच, किसानों को उनके घरों को लौटने और उनसे टीका लगवाने का अनुरोध किया गया था। हर बार जब मंत्री संतोषजनक जवाब देने में विफल रहते, सदन के सदस्य उन्हें शर्मिंदा करते, अपने हाथ उठाते और उनके जवाबों पर आपत्ति जताते।

बाजवा ने बाद में मीडिया से कहा कि कृषि मंत्री सवालों के जवाब देने में नाकाम रहे, जिसके चलते संसद के सदस्यों ने मंत्री को शर्मिंदा किया, जिससे बाधा हुई।उन्होंने कहा, ‘प्रश्न पूछा गया कि जब प्रधानमंत्री ने स्वयं इस तथ्य पर जोर दिया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य था, यह वर्तमान में भी है और यह रहेगा तो फिर इसे कानून बनाने में क्या समस्या है।

अगर सभी तीनों कृषि कानून किसानों के लिए बनाए गए हैं तो उन्हें रद्द करके और किसानों से विचार विमर्श करके दोबारा बनाया जाए। अर्शी खान ने कहा कि किसान संसद की कार्यवाही अल्प समय के लिए स्थगित की गई और शुक्रवार की कार्यवाही भी “उसी प्रकार से हुई जैसे असल संसद में चलती है।” मानसून सत्र के साथ तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 200 किसान गुरुवार को जंतर-मंतर पहुंचे हैं। उपराज्यपाल अनिल बैजल ने अधिकतम 200 किसानों को नौ अगस्त तक प्रदर्शन की विशेष अनुमति दी है।



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