Sonu Sood ने की Ukraine में फंसे भारतीयों की मदद, स्टूडेंट ने दिल्ली आकर सुनाई बचकर भागने की पूरी कहानी


दुनिया अभी यूक्रेन और रूस का युद्ध (Russia Ukraine war) देखकर परेशान है। जो वहां युद्ध के हालात हैं उसमें कई भारतीय स्टूडेंट्स भी फंसे हैं और उन्हें लेकर सभी काफी चिंतित हैं। काफी बच्चे सुरक्षित भारत लौट भी आए हैं और कइयों को लाने की तैयारी की जा रही है। इस युद्ध वाले हालात में एक बार फिर से सोनू सूद (Sonu Sood) मसीहा बने नजर आ रहे हैं। यूक्रेन से सुरक्षित लौटे एक स्टूडेंट ने वहां का पूरा हाल सुनाया और बताया कि सोनू सूद की टीम ने कैसे उनकी मदद की।

यूक्रेन से अपने देश के लोगों को निकालने वाली चौथी फ्लाइट जब दिल्ली एयरपोर्ट पर आई तो वहां से जान बचाकर लौटे एक स्टूडेंट ने अपनी पूरी कहानी सुनाई। इस स्टूटेंड ने बताया कि उन्हें सोनू सूद की टीम ने सही गाइड की और उनकी मदद की।

सोनू सूद ने खुद यह वीडियो शेयर किया है और लिखा है, ‘यूक्रेन में हमारे स्टूडेंट्स के लिए काफी मुश्किल समय और शायद अब तक का मेरा सबसे मुश्किल असाइनमेंट। सौभाग्य से हम कई स्टूडेंट्स को बॉर्डर पार करके सुरक्षित क्षेत्र में जाने में मदद करने में सफल रहे। आइए कोशिश करते रहें, उन्हें हमारी जरूरत है।’ सोनू सूद ने अपने पोस्ट में भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास को भी शानदार काम करने के लिए बधाई दी है और उन्होंने लगातार सहयोग के लिए उनका धन्यवाद भी किया।

इस वीडियो में एक स्टूडेंट लक्ष्मण अपनी आपबीती शेयर करता दिख रहा है और वह कह रहा है कि 15 दिनों में आज उन्हें सुकून मिला है और ऐसा लग रहा है कि वह मौत के मुंह से निकलकर बाहर आए हैं। वह कह रहे हैं, ‘मैं ल्वीव का मेडिकल स्टूडेंट हूं औऱ यह सबसे सेफ था। एंबैसी से हमें 15 दिनों पर युद्ध के कंडिशन के बारे में नोटिस आया कि आपकी इच्छा हो तो आप जा सकते हैं और यदि आपको सेफ लग रहा हो तो आप कुक सकते हो। सभी कह रहे थे कि ल्वीव सेफ है, यूनिवर्सिटी तो ये कह रही थी कि वॉर तो 8 साल से चल रहा है तो यूनिवर्सिटी थोड़े बंद कर देंगे। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी खुली रहेगी और यूक्रेन का सिस्टम ये है कि तीन एब्सेंट पर वे निकाल देते हैं। इसलिए डरकर मैं नहीं आया। जब ये कंडिशन शुरू हुई, एंबैसी ने कहा जिनके पास जो बॉर्डर है आप वहां से निकल जाइए। मेरे पास था पोलैंड बॉर्डर।’

उन्होंने आगे कहा, ‘पोलैंड बॉर्डर में 3 बॉर्डर हैं, मैं निकला और रात हो चुकी थी। बस ने मुझे 20 मिनट पहले उतार दिया था। ठंड में बड़ी मुश्किल से हमने अपने लिए सेंटर ढूंढा, सुबह होते ही हम वहां से निकले और मेरे फ्रेंड ने वीडियो भेजा कि वहां मारपीट हो रही है और बच्चों के साथ गंदा सलूक हो रहा है। फिर मैं गया नहीं और लौटकर आ गया। इसके बाद मेरा कॉन्टैक्ट हुआ सोनू सूद की टीम से। उनकी टीम ने मुझे गाइड किया और बताया कि कौन सा बॉर्डर सबसे सेफ है, जबकि उस बॉर्डर का मेंशन एंबेसी ने नहीं किया था। मैं रात के 12 बजे निकला और तिरंगा लगाकर निकाला और इसका असर ये हुआ कि झंडे को देखकर किसी ने रोका नहीं और बॉर्डर पर हमें खाना भी खिलाया। फिर वहां से मैं सुरक्षित निकल पाया।’

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