यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र ने मांगी मदद, अब खाने का सामान भी नहीं बचा


यूक्रेन में फंसे मध्य प्रदेश के धार जिले के एक छात्र ने अपनी हालत बताई है। खारकीव के मेट्रो स्टेशन में फंसे छात्र ने कहा है कि उनके पास खाने-पीने का सामान ज्यादा नहीं बचा और कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही। यूक्रेन या भारत की सरकार उसके साथ फंसे भारतीय छात्रों की कोई मदद नहीं कर रही। उन्हें 1500 किमी दूर बॉर्डर तक पहुंचने को कहा जा रहा है जबकि बाहर बमबारी हो रही है। दूतावास के लोग फोन पर कह रहे- मरोगे नहीं।

छात्र प्रतीक पाटीदार धार जिले के घाटाबिल्लोद का रहने वाला है। पिछले चार दिनों से प्रतीक अपने दोस्तों के साथ खारकीव मेट्रो स्टेशन में रह रहा है। यहां कोई सुविधा नहीं है और बाहर बमबारी हो रही है। धमाकों की आवाज रह-रहकर वहां फंसे लोगों को साफ सुनाई दे रहे हैं। धमाकों के दौरान मेट्रो स्टेशन में भारी वाइब्रेशन हो रहा है। फर्श पर बैठे लोग इससे सहम जाते हैं।

प्रतीक ने बताया कि अब उनके पास खाने-पीने का सामान भी ज्यादा नहीं बचा। यूक्रेन सरकार उनके खाने-पीने की खास व्यवस्था नहीं कर रही। स्टेशन के अंदर बच्चे बीमार हो रहे हैं। उन्हें दवा तक नहीं मिल रही।प्रतीक के साथ करीब 70-75 भारतीय छात्र मेट्रो स्टेशन में छुपे हुए हैं। उनके साथ यूक्रेन के स्थानीय लोग भी अपने घर छोड़कर वहांहैं। प्रतीक का कहना है कि भारतीय दूतावास भी उनकी कोई मदद नहीं कर रहा है। दूतावास के नंबर पर बात कर खाने की दिक्कत के बारे नें बताया तो जवाब मिला- एक दो दिन खाए बिना मर नहीं जाओगे।

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