Ukraine President News: सोशल मीडिया पर हीरो बने राष्ट्रपति जेलेंस्की की एक जिद का खामियाजा भुगत रहा यूक्रेन?


‘मैं यहीं हूं। हम हथियार नहीं डाल रहे हैं। हम अपने देश की रक्षा करेंगे, क्योंकि हमारा हथियार सच्चाई है और हमारी सच्चाई ये है कि ये हमारी भूमि है, हमारा देश है, हमारे बच्चे हैं, और हम इस सब की रक्षा करेंगे। यूक्रेन की जय।’

जिस दिन से यूक्रेन और रूस के बीच जंग (Ukraine Russia War) छिड़ी है…यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की (Ukraine President Volodymyr Zelensky) लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर आर्मी की ड्रेस पहने उनकी ये तस्वीर और उनके वीडियो खूब वायरल (Viral Video) हैं। मुश्किल वक्त में भागने के बजाय अपने देश के साथ मजबूती से खड़े रहने के उनके जज्बे की लोग तारीफ कर रहे हैं। लेकिन इस बीच ये भी कहा जा रहा है कि यूक्रेन को इस मुश्किल में डालने के जिम्मेदार भी तो जेलेंस्की ही हैं। कुछ जानकारों का मानना है कि जेलेंस्की की जिद और अदूरदर्शिता का ही नतीजा है कि आज यूक्रेन को ये सबकुछ झेलना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रोफेसर ब्रह्मदीप अलूने कहते हैं-

‘एक कॉमेडियन को देश का राष्ट्रपति चुनने की गलती कितनी भारी पड़ सकती है, इसका प्रमाण है यूक्रेन। शक्तिशाली पड़ोसी रूस को चुनौती देकर एक खूबसूरत देश को विध्वंस की कगार पर धकेल दिया। राष्ट्रपति जेलेंस्की की नाटो में शामिल होने की ज़िद भूराजनैतिक दृष्टि से आत्मघाती साबित हुई। इन्होंने फौजी की वर्दी पहनकर दुनिया मे दिलेरी का खूब प्रचार कर लिया, अब ये रूस से समझौता भी कर लेंगे। लेकिन इनकी राजनैतिक अदूरदर्शिता से लाखों परिवार तबाह हो गए। उन्हें पता ही नहीं कि वे किसकी गलतियों का परिणाम भोग रहे है। दरअसल राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से बढ़कर कभी कोई हित नहीं हो सकता। काश, यूक्रेन के राष्ट्र्पति इस सिद्धांत को समझ पाते।’

प्रोफेसर अलूने ने ये आशंका भी जताई है कि युद्ध से यूक्रेन का वर्तमान तो बर्बाद हो ही रहा है, अब आने वाली पीढ़ियां भी रूस से बदले की आग में जलती रहेंगी। वो कहते हैं-

राष्ट्रीय नेतृत्व अगर देश की सुरक्षा न कर सके तो उसे सत्ता से हट जाना चाहिए। जिलेन्सकी ने सत्ता में बने रहने के लिए अपने शक्तिशाली दुश्मन से युद्ध का रास्ता चुना और देश के भविष्य को संकट में डाल दिया। आने वाले समय में दोनों राष्ट्रों के बीच शांति वार्ता हो भी जाए, फिर भी यूक्रेन को इस युद्ध से उबरने में कई साल लग जायेंगे। अब यूक्रेन के युवा पीढ़ी बदले की आग में रूस से लड़ती रहेंगी और ये यूक्रेन के भविष्य के लिए ठीक नहीं होगा। राष्ट्र प्रमुख सामान्य जनता को युद्ध में झोंक दे, ये अतिराष्ट्रवाद है। जिलेन्सकी ने भी वही किया।

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