कर्नाटकः शादी भारत में हुई है तो Overseas सिटीजन ऑफ इंडिया यहीं पर ले सकते हैं तलाक- बोला HC



बेंगलुरुः जस्टिस दीक्षित ने कहा कि उनकी शादी रजिस्टर्ड इंग्लैंड में हुई लेकिन उससे भारत में आर्य समाज पद्धित के तहत हुई सेरेमनी को झुठलाया नहीं जा सकता। पत्नी कोर्ट के दायरे में रह रही है।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने Overseas सिटीजन ऑफ इंडिया का स्टेटस रखने वाले नागरिक को तलाक के लिए भारतीय कोर्ट में अपील करने का अधिकार दिया है। हाल के फैसले में अदालत ने कहा कि ऐसे लोगों को NRI (आप्रवासी भारतीय) की तरह से माना जाता है। वैवाहिक मामलों में ऐसे लोगों को भारतीय कोर्ट में अपील करने का पूरा अधिकार है।

जस्टिस कृष्ण दीक्षित की सिंगल बेंच ने अपने फैसले में कहा कि अगर शादी भारत में हुई है तो पार्टियों को तलाक के लिए विदेशी अदालत में जाने को नहीं कहा जा सकता। ऐसे केस में याचिका दाखिल करने वाली महिला है तो ये बात और ज्यादा पुख्ता तरीके से लागू हो जाती है। दरअसल, कोर्ट ब्रिटिश नागरिकों से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रहा था। दोनों ने भारत में आर्य समाज के नियमों के तहत विवाह रचाया और बाद में शादी की सिविल सेरेमनी ब्रिटेन में जाकर की। इस केस में पति ईसाई धर्म को मानने वाला है जबकि पत्नी हिंदी है।

दोनों ने Overseas सिटीजन ऑफ इंडिया कार्ड हासिल कर रखा है। 2006 से दंपत्ति भारत में ही रह रहा है। दोनों के एक बेटी है जिसके पास ब्रिटेन की नागरिकता है। 2018 में दोनों के बीच विवाद हुआ तो पत्नी ने कोर्ट की शरण ली। लेकिन पति ने ये कहकर विरोध किया कि उनकी शादी ब्रिटेन में दर्ज हुई थी तो वहां की अदालत इस मामले में फैसला कर सकती है।

हाईकोर्ट ने कहा कि बेशक दोनों विदेशी नागरिक हैं लेकिन भारत की अदालत में अपील दायर की जा सकती है। जस्टिस दीक्षित ने कहा कि उनकी शादी रजिस्टर्ड इंग्लैंड में हुई लेकिन उससे भारत में आर्य समाज पद्धित के तहत हुई सेरेमनी को झुठलाया नहीं जा सकता। पत्नी कोर्ट के दायरे में रह रही है।

क्या है ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया

विदेश में बसे और वहां की नागरिकता ले चुके भारतीय लोगों के लिए एक खास तरह की सुविधा का नाम है ओसीआई कार्ड। ओसीआई का मतलब है- ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया। दुनिया के कई देशों में दोहरी नागरिकता की सुविधा है पर भारतीय नागरिकता कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति किसी और देश की नागरिकता ले लेता है तो उसे अपनी भारतीय नागरिकता छोडनी पड़ती है, ऐसे लोगों की संख्या लाखों में है जो अमेरिका, ब्रिटेन या कनाडा जैसे देशों की नागरिकता ले चुके हैं लेकिन भारत से जुड़ाव बना हुआ है।

इन लोगों को भारत की नागरिकता छोड़ने के बाद भारत आने के लिए वीजा लेना पड़ता था। ऐसे ही लोगों की सुविधा का ख्याल करते हुए 2003 में भारत सरकार पीआईओ कार्ड का प्रावधान किया। पीआईओ का मतलब है- पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन। पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, अफगानिस्तान और ईरान कुछ ऐसे देश हैं, जहां के भारतीय मूल के लोगों को यह सुविधा नहीं मिल सकती।

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