Russia-Ukraine War: जंग के बीच रूसी करेंसी रूबल गिरा धड़ाम! आर्थिक दबाव में बैंक ऑफ रूस ने कर दिया ये बड़ा एलान


नई दिल्ली: Russia-Ukraine crisis/ Bank of Russia: रूस -यूक्रेन विवाद ने दुनिया भर में भूचाल ला दिया है. अब यूरोप और अमेरिका की तरफ से लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के देखते हुए बैंक ऑफ रूस (Bank of Russia) ने अपने देश पर लगाए सभी आर्थिक प्रतिबंधों के बीच इंट्रेस्ट रेट में 100 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी की है. रूस ने महत्वपूर्ण ब्याज दरों को 9.5 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया है. आपको बता दें कि यह 2003 के बाद का उच्चतम स्तर है. इतना ही नहीं, रसियन सेंट्रल बैंक ने विदेशी निवेशकों और ब्रोकरेज हाउस को रसियन सिक्यॉरिटीज बेचने से भी रोक दिया है.

ऑल टाइम लो लेवल पर रूबल

रूस-यूक्रेन विवाद को देखते हुए यूरोप और अमेरिका ने रूस के 640 बिलियन डॉलर के रिजर्व के अधिक हिस्से को ब्लॉक कर दिया है. इस वजह से रूस की इकोनॉमी पर बहुत बुरा असर हुआ है. यूक्रेन पर हमले (Russia-Ukraine crisis) के बीच सोमवार को रसियन करेंसी रूबल में करीब 30 फीसदी की गिरावट देखी गई जो डॉलर के मुकाबले ऑल टाइम लो लेवल पर पहुंच गया. डॉलर के मुकाबले रूबल 117 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया.

अमेरिका और यूरोप ने इस विवाद के बाद रूस पर आर्थिक प्रतिबंध बढ़ा दिया है. शनिवार को SWIFT इंटरनेशनल पेमेंट पर भी बैन कर दिया गया जिससे रूस की करेंसी पर भारी दबाव है. ऐसे में रूस ने इंट्रेस्ट रेट बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है. रूस के इस फैसले को लेकर अलरिच लचमैन ने कहा कि रसियन सेंट्रल बैंक ने पैनिक सेलिंग को रोकने के लिए यह बैन लगाया है.

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फॉरन रिजर्व पर रोक की कोशिश

रूस के यूक्रेन पर चढ़ाई के खिलाफ कार्रवाई के तहत यूरोपियन यूनियन ने सेंट्रल बैंक ऑफ रसिया के रिजर्व असेट का मैनेजमेंट रोक दिया है. इतना ही नहीं, रूस के करीब 640 बिलियन डॉलर रिजर्व पर भी रोक लगाने की भी कोशिश की गई है जिससे वह इस फंड को यूज न कर पाए. वेस्टर्न देशों के इस रवैये पर रसियन सेंट्रल बैंक ने कहा था कि वह अपने बैंकों को कैश और नॉन-कैश रूबल लिक्विडिट प्रोवाइड करेगा.

रसिया का क्रेडिट स्कोर भी घटा 

इस बीच ग्लोबल रेटिंग एजेंसी S&P ने भी सख्त रुख अपनाते हुए रसिया का क्रेडिट स्कोर घटाकर इसे इन्वेस्टमेंट के लिए उपयुक्त नहीं बताया है. मूडीज ने भी रूस की रेटिंग को जंक से केवल एक पायदान उपर रखा है. ऐसा माना जा रहा है कि SWIFT ट्रांजैक्शन पर रोक लगने के कारण वहां के बैंकिंग सेक्टर की हालत और पतली हो सकती है.

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