PM Narendara Modi to inaugurate asia largest bio CNG plant at Indore on 19 February check details


इंदौर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 19 फरवरी को इंदौर में बने एशिया के पहले सबसे बड़े बायो सीएनजी प्लांट का शुभारंभ करेंगे. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में पीएम के हाथों वर्चुअली शुरू होने वाला इको फ्रेंडली प्लांट पांच साल से लगातार देश में नंबर वन रहने वाले इंदौर के खाते में एक खूबी और डाल देगा. गीले कचरे से सीएनजी बनेगी और शहर की पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सारी बसें अब डीजल की जगह सीएनजी गैस से चलेंगी जिससे शहर की आवोहवा और अच्छी होगी. हर साल देश में स्वच्छता की रैंकिंग होती है. ज़ाहिर है कि पांच साल से इंदौर के पास देश के नंबर वन स्वच्छ शहर होने का खिताब है और अब इस प्लांट के शुरू होने के बाद शहर को स्वच्छता के पैमानों पर उतरना और आसान होगा.

‘इंदौर रहेगा नंबर वन, इंदौर लगाएगा स्वच्छता का छक्का…..’ शहर के गली-मोहल्लों में घूमो तो सुबह से शाम तक ये गाना बजते सुनाई देता है. गीले कचरे का बायो सीएनजी प्लांट में इतने बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर सचमुच इंदौर ने स्वच्छता के क्षेत्र में एक और छक्का लगा दिया है. शहर का हर घर सूखे कचरे और गीले कचरे को पूरी तरह अलग-अलग करता है. नगर निगम की गाड़ियां गीले कचरे को सीएनजी प्लांट पर पहुंचाती हैं. बदले में इस प्लांट से रोज लगभग 18000 किलो सीएनजी गैस और 100 टन जैविक खाद मिलेगा. इंदौर ने आम के आम गुठलियों के दाम वाली कहावत सच साबित कर दी है.

सीएनजी प्लांट का सपना हक़ीकत में बदलने में अहम भूमिका अदा करने वाली इंदौर नगर निगम की कमिश्नर प्रतिभा पाल भी असली क्रेडिट इंदौर शहर की जनता को देती है. पाल के मुताबिक हर घर का नागरिक अपने घरों से पिछले पांच साल से कचरे के अलग-अलग कर रहे हैं. सूखा कचरा अलग और गीला कचरा अलग. कचरे को अलग-अलग करने का स्तर इंदौर में इतना अच्छा है कि देश के विभिन्न शहरों में 200 सेंपल लेकर जब सर्वे हुआ तो नतीजा ये आया कि इंदौर में 99 फीसदी से ज्यादा कचरे को अलग अलग करने की शुद्धता है जो कि कई यूरोपियन देशों से अच्छी है. यही कारण है कि इस बायो सीएनजी प्लांट का जो मैन फीडर स्टॉक है वो पूरी तरह से घरों से निकलने वाला शुद्ध गीला कचरा होता है, जो पूरा ऑर्गेनिक वेस्ट है.

कमिश्नर की मानें तो इंदौर के घरों में हरा डब्बा रखकर इतने अच्छे से कचरा इकट्ठा किया जाता है कि प्रोसेसिंग फैसिलिटी इंदौर में स्थापित हो पाई. आईएमसी कमिश्नर प्रतिभा पाल बताती हैं कि अगर इंदौर में स्वच्छता रखने के लिये प्रमुख रूप से तीन तरह के खर्चे होते हैं. पहला खर्चा है: डोर टू डोर वेस्ट कलेक्शन का. दूसरा खर्चा है प्रोसेसिंग का. यानि कचरे को आगे प्रोसेस करने का. तीसरा खर्चा है सैलरी और वेज का. सफाई मित्र जो रोज सफाई करते हैं. स्वच्छता की प्रत्येक चीज पर सालाना इंदौर नगर निगम 280-290 करोड़ रूपये खर्च करता है. इसमें सभी चीजें कलेक्शन, ब्रांडिंग, प्रोसेसिंग शामिल हैं. रोड रिपेयर और सीवर सिस्टम भी स्वच्छता का हिस्सा हो चुका है जो नगर निगम की 1000-1200 करोड़ की सालाना वसूली है.

इंदौर में 15 एकड़ में 150 करोड़ रुपए की लागत से बायो नेचुरल गैस सीएनजी प्लांट बना है.

हैरानी की बात ये है कि इंदौर के लोगों ने कचरे का सेग्रेशन लेवल (Segregation Level) इतना बढ़ा दिया है कि उसे प्रोसेस करने में नगर निगम पर ज़ीरो बजट का खर्चा आता है. बायो सीएनजी प्लांट से अब नगर निगम को सालाना ढ़ाई करोड़ रुपये की आमदनी होगी. बायो सीएनजी प्लांट से 18000 किलो बायो सीएनजी बनेगी जो लगभग शहर की 400 बसों को चलाएंगी. यानी शहर की 400 डीज़ल की बसें रोड से हटेंगी औऱ उसकी जगह बायो सीएनजी की बसें आएंगी. इंदौर में 15 एकड़ में 150 करोड़ रुपए की लागत से बायो नेचुरल गैस सीएनजी प्लांट बना है. शहर की स्वच्छता और पर्यावरण में चार चांद लगना तय है क्योंकि शुद्ध मिथेन गैस लोकल पब्लिक ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल होगी. गैस प्लांट से निगम को बाज़ार से 5 रुपए कम में सीएनजी गैस मिलेगी.

जब प्लांट की शुरुआत हुई तब आईएएस मनीष सिंह इंदौर नगर निगम के कमिश्नर थे. फिलहाल मनीष सिंह इंदौर के कलेक्टर हैं. वो मानते हैं कि बायो सीएनजी प्लांट की खूबी ये है कि 550 मीट्रिक टन रोज़ गीले कचरे को प्रोसेस करके सीएनजी गैस बनेगी. अगर ये नहीं किया जाता तो एक साल में ये ऑर्गेनिक वेस्ट गीला कचरा 1.30 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाई-ऑक्साइड उत्सर्जित करता. जो कहीं ना कहीं ग्रीन हाउस लेयर औऱ ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देती है और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता है. कलेक्टर मनीष सिंह भी स्वच्छतम इंदौर की क्रेडिट जनता को ही देते हैं. सिंह के मुताबिक इंदौर के लिये गौरव की बात है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 550 मीट्रिक टन बायो सीएनजी प्लांट का लोकार्पण कर रहे हैं.

इंदौर का यह प्लांट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वेस्ट-टू-वेल्थ सोच पर आधारित है. नगर निगम इंदौर ने ये प्लांट लगाया है. इसमें गीले कचरे से 550 मीट्रिक टन बायो सीएनजी रोज बनायी जाएगी. ये प्लांट पूरे एशिया महाद्वीप में जैविक अपशिष्ट से बायो सीएनजी का सबसे बड़ा और देश का पहला प्लांट है. शहर के देवगुराडिया ट्रेंचिंग ग्राउंड पर ये बनाया गया है. ये बायो सीएनजी प्लांट पी.पी.पी. मॉडल पर आधारित है. खास बात ये है कि प्लांट लगाने में नगर निगम को पैसा खर्च नहीं करना पड़ा बल्कि प्लांट लगाने वाली एजेंसी IEISL नई दिल्ली नगर निगम इन्दौर को सालाना 2.50 करोड़ रुपये प्रीमियम के रूप में देगी.

आपके शहर से (इंदौर)

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश

Tags: Indore news, Narendra modi

.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published.