’22 साल से अलग रह रहे कपल की शादी मर चुकी है…’, सुप्रीम कोर्ट ने तलाक पर लगाई मुहर


नई दिल्ली: सुधार न होने वाले ब्रेकडाउन ऑफ मैरिज ( Irretrievable Breakdown of Marriage) के मामले में तलाक के लिए दोनों पक्षों की सहमति अनिवार्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस मामले में तलाक की डिक्री पारित करते हुए कहा कि दोनों पक्षों की शादी इस कदर टूट चुकी है कि वह रिपेयर नहीं हो सकती है। अदालत ने कहा कि 22 साल से अलग रह रहे कपल की शादी मर (Dissolution of Marriage) चुकी है। संबंधों में सुधार की गुंजाइश नहीं बची। फैमिली कोर्ट (Family Court) ने पति के फेवर में तलाक की डिक्री (Decree of dissolution of Marriage) पारित की थी। क्रुएलिटी ग्राउंड पर तलाक का फैमिली कोर्ट ने जो आदेश दिया था उसे मद्रास हाई कोर्ट (Madras High Court) ने पलट दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मामला आया।

शीर्ष अदालत ने कहा कि दोनों की शादी 29 अगस्त 1999 को हुई थी। लेकिन, बाद में लड़की 18 जनवरी 2000 को पति को छोड़कर अपने मायके चली गई और लौट कर नहीं आई। दोनों उसके बाद से लगातार अलग रह रहे हैं। इसे लगभग 22 साल हो चुके हैं।

सेक्स वर्करों की पहचान प्रक्रिया जारी रखें राज्य, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आंकड़े भरोसेमंद नहीं

सुप्रीम कोर्ट में महिला की ओर से दलील दी गई कि अनुच्छेद-142 के तहत सुप्रीम कोर्ट सुधार न होने वाले ब्रेकडाउन ऑफ मैरिज के मामले में तलाक की डिक्री पारित नहीं कर सकता है। कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए पहले के कई जजमेंट का हवाला देकर कहा कि अगर ब्रेकडाउन ऑफ मैरिज जिसमें सुधार की गुंजाइश न बची हो उसमें तलाक की डिक्री के लिए दोनों पक्षों की सहमति की अनिवार्यता नहीं है।

सुपरटेक का टि्वन टावर 22 मई तक टूट जाएगा, नोएडा अथॉरिटी ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर दोनों पक्षों में तलाक लेने को लेकर रजामंदी है तो वह फैमिली कोर्ट जा सकता है। लेकिन, एक की सहमति नहीं है तभी अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल होता है। अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों में सुलह और दोबारा एक होने का कोई चांस नहीं है। दोनों की शादी मर चुकी है और वापसी की गुंजाइश नहीं है। शादी इस कदर टूट चुकी है कि वह रिपेयर नहीं हो सकती है। ऐसे में न्याय के हित में यही संपूर्ण न्याय है कि तलाक की डिक्री पारित की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद-142 के तहत अपने विशेष अधिकार का प्रयोग करते हुए शादी को खत्म कर दिया और कोर्ट ने याची को निर्देश दिया है कि वह प्रतिवादी पत्नी को 20 लाख रुपये आठ हफ्ते के भीतर भुगतान करे।

.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published.