चाणक्य के बिना चंद्रगुप्त और समर्थ के बिना शिवाजी को कौन पूछेगा? राज्यपाल के बयान से महाराष्ट्र में मचा बवाल


मुंबई: चाणक्य बिना चंद्रगुप्त को कौन पूछेगा? इसी प्रकार स्वामी समर्थ के बिना शिवाजी महाराज(Chhatrapati Shivaji Maharaj) को कौन पूछेगा? जीवन में गुरु का काफी महत्व होता है। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी(Governor Bhagat Singh Koshyari) के इस बयान के बाद राज्य में बवाल मचा हुआ है। एनसीपी(NCP) ने गवर्नर के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। सांसद सुप्रिया सुले(Supriya Sule) ने राज्यपाल को बॉम्बे हाई कोर्ट(Bombay High Court) की औरंगाबाद खंडपीठ की उस ऑडर कॉपी ट्वीट किया है। जिसमें यह कहा गया है कि शिवाजी महाराज और स्वामी समर्थ रामदास के बीच कोई गुरु और शिष्य का रिश्ता था।

वहीं नाशिक जिला में एनसीपी ने राज्यपाल हटाओ मुहिम की शुरुआत करते हुए राष्ट्रपति को पत्र भेजना शुरू किया है। अब इस विवाद में छत्रपति उदयनराजे भोसले भी उतर गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने सभी शिवप्रेमियों की भावना को ठेस पहुंचाई हैं। उन्हें मांग की है कि गवर्नर तत्काल अपना बयान वापस लें।

सुप्रिया सुले ने कहा
सुप्रिया सुले ने राज्यपाल के बयान पर विरोध जताते हुए कहा कि 16 जुलाई 2018 को बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ ने एक फैसला दिया था। जिसके अनुसार जांच अधिकारियों, इतिहास के जानकारों और अन्य गणमान्य लोगों से जांच पड़ताल के बाद यह पता चला कि छत्रपति शिवाजी महाराज और रामदास स्वामी समर्थ रामदास के बीच में कभी कोई मुलाकात नहीं हुई थी। और ना ही उन दोनों के बीच में शिष्य और गुरु के रिश्ते का ही कोई भी प्रमाण मिलता है।

क्या बोले राज्यपाल
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राज्य के औरंगाबाद जिले के तापड़िया नाट्यमंदिर एकदिवसीय श्री समर्थ साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसी कार्यकम के दौरान महामहिम राज्यपाल ने यह बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अपने समाज और राष्ट्र को बलशाली करने के लिए संत विचारों का प्रवाह जरूरी है। उन्होंने कहा कि अपने देश में समृद्ध गुरु परंपरा चली आ रही है। मानव जीवन में सदगुरू की प्राप्ति होना बड़ी बात होती है। चाणक्य के बिना चंद्रगुप्त को कौन पूछेगा? समर्थ के बिना शिवाजी को कौन पूछेगा? गुरुवार का बड़ा महत्व होता है।

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