RSS on Women Marriage: महिलाओं की शादी की उम्र पर बहस, आखिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्या चाहता है?


नई दिल्ली: देश में लड़कों की तरह लड़कियों के भी विवाह की न्यूनतम उम्र 21 साल किए जाने के प्रस्ताव पर अलग-अलग तरह के विचार सामने आ रहे हैं। एक तरफ वह तबका है जो चाहता है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में लड़कियों को लड़कों की तरह आगे बढ़ने और अपने सपनों को सच करने का मौका मिले क्योंकि जल्दी शादी से वे पारिवारिक बंधनों में बंधकर रह जाती हैं। दूसरी तरफ, वे लोग भी हैं जो कहते हैं कि यह तो व्यक्ति की अपनी इच्छा पर होना चाहिए कि वह अपनी बेटी की शादी कब करता है। वैसे भी आजकल पढ़ा-लिखा समाज बेटियों की शादी 21 साल के बाद ही करता है। इसमें वह बेटी की पढ़ाई और नौकरी को भी ध्यान में रखता है। ऐसे में संघ की महिला मोर्चा ने अपना रुख सामने रखा है।

संघ की महिला शाखा समर्थन में लेकिन…
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की महिला मोर्चा राष्ट्रीय सेविका समिति (Rastriya Sevika Samiti) ने कहा है कि लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष करने का विचार तो सही है, लेकिन इसे सरकार की तरफ से थोपे जाने की बजाय जागरुकता पैदा की जानी चाहिए ताकि इसे स्वतः सामाजिक स्वीकृति मिल जाए।

दरअसल, संघ की महिला मोर्चा ने कहा है कि अच्छे से शिक्षित होने के बाद ही लड़कियों की शादी होनी चाहिए लेकिन अगर इसे थोपा जाएगा तो उसके अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे। समिति ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक 11 मार्च से शुरू हो रही है, जहां कई मसलों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें से एक प्रमुख मुद्दा लड़कियों की शादी की उम्र सीमा 18 से 21 साल करने के प्रस्ताव का भी है।

संसद में बिल पेश
दिसंबर में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान, केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इस बाबत बिल पेश किया था। लेकिन व्यापक विचार-विमर्श के लिए इस बिल के बाद में लोकसभा ने संसदीय समिति के पास भेज दिया।

पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने इस प्रस्तावित कानून को एक महत्वपूर्ण कदम बताया है जिससे समाज में लड़के और लड़कियों को समान अवसर मिल सकेंगे। राष्ट्रीय सेविका समिति बाल विवाह के खिलाफ है, इस पर जोर देते हुए इसकी प्रचार प्रमुख सुनीला सोहवानी ने कहा कि लड़कियों को उचित पालन-पोषण एवं शिक्षा के बाद ही शादी करनी चाहिए जिससे वे एक काबिल इंसान बन सकें।

पक्ष और विपक्ष में भी लोग
जब उनसे शादी की उम्र बढ़ाने संबंधी सरकार के विधेयक के बारे में पूछा गया तो सोहवानी ने कहा कि समिति ने समाज की राय जानी है और कुछ इसके पक्ष में हैं तो कुछ इसके विरोध में भी हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारे द्वारा अपने कार्यकर्ताओं एवं समाज से जुटाई गई राय के अनुसार लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने के संबंध में दोनों प्रकार के विचार हैं।’

सोहवानी ने कहा, ‘यह देखा गया है कि महिलाओं की शादी की उम्र जैसे सामाजिक मुद्दों पर कुछ थोपने से शायद वांछित परिणाम नहीं मिलेगा। ऐसे मुद्दों से जन-जागरूकता एवं व्यापक विचार-विमर्श के बाद निपटना बेहतर होता है।’ भाजपा की अगुआई वाली केंद्र सरकार की पहल के सवाल पर सोहवानी ने इसे उपयुक्त करार दिया एवं कहा कि सरकार इस मुद्दे पर व्यापक विचार-विमर्श कर रही है।

विरोध में मुस्लिम संगठन
मोदी सरकार के इस फैसले का कई मुस्लिम नेता और संगठन विरोध कर रहे हैं। देवबंद से लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इसके खिलाफ है। बोर्ड का अपना तर्क है कि इससे जुर्म बढ़ जाएगा। सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने यहां तक कह दिया कि इससे आवारगी बढ़ेगी।

18 साल के पुरुष और महिला कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, कारोबार शुरू कर सकते हैं, प्रधानमंत्री चुन सकते हैं। सांसदों और विधायकों का चुनाव कर सकते हैं लेकिन शादी क्यों नहीं कर सकते? यह हास्यास्पद है कि वह लिव इन के लिए सहमति जता सकते हैं लेकिन जीवनसाथी का चुनाव नहीं कर सकते।

असदुद्दीन ओवैसी

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि आमतौर पर लोग कम उम्र में बेटियों की शादी नहीं करते लेकिन कभी ऐसे हालात बन जाते हैं तो करनी पड़ती है। मुस्लिम संगठनों का कहना है कि शादी करने की सही उम्र इंसान के सेहत और आमदनी के मुताबिक होती है। कुछ अजीबोगरीब तर्क भी रखे जा रहे हैं। यह मुद्दा पिछले कुछ महीनों से डिबेट का विषय बना हुआ है।

कुछ खाप भी विरोध में
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी कहा है कि अगर 15-16 साल में कोई लड़की शादी करना चाहे तो उसे अपने मां-बांप से इजाजत लेनी चाहिए। उन्होंने सरकार से सभी पक्षों से इस पर राय लेने की बात कही। भाजपा के नेता कह रहे हैं कि सरकार ने बहुत सोच-समझकर यह फैसला किया है। कुछ खाप कह रहे हैं कि गांवों में लड़कियों की शादी की उम्र 18 से 21 साल करना ठीक नहीं है। उन्होंने सरकार से इस पर फिर से सोचने का कहा है।

ऐसे में सरकार इस पर व्यापक मंत्रणा कर रही है। शिक्षा, खेल, महिला एवं बाल विकास पर बीजेपी के राज्यसभा सांसद विनय सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने इस मुद्दे पर जनता से राय मांगी है।

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