Russia Ukraine War News: क्या सच में परमाणु बम फोड़ देगा रूस? पुतिन की न्यूक्लियर आर्मी के बारे में सबकुछ जानिए


मास्को: तो क्या सच में दुनिया में परमाणु युद्ध का खतरा मंडराने लगा है? दरअसल, रूस के अपने परमाणु आर्मी को अलर्ट करने के बाद पूरी दुनिया में आशंकाओं के बादल मंडराने लगे हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियारों के जखीरा वाले रूस की धमकी खौफनाक है। रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine War) के बीच मास्को की इस तैयारी ने डरा दी है। ने रूस के परमाणु हथियारों की कमान वाले परमाणु निवारक बल (Russian Nuclear Deterrent Forces) बेहद खतरनाक दस्ता माना जाता है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने नाटो देशों के आक्रामक बयानों के बाद ये आदेश जारी किया है। माना जा रहा है कि पुतिन इसके जरिए अमेरिका और नाटो पर दबाव बना रहे हैं। आम तौर पर परमाणु हथियार दस्ते वाले ऐसे यूनिट्स को अलर्ट करने का दस्तूर नहीं रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि रूस केवल इसे धमकी के तौर पर देख रहा है। रूसी क्षेत्र में किसी ने हमला नहीं किया है। कुछ अमेरिकी विशेषज्ञों ने कहा कि यूक्रेन की तुलना में रूस काफी ताकतवर है। इसलिए इस अलर्ट को केवल दबाव के तौर पर ही देखना चाहिए।

क्या नाटो पर दबाव बनाना चाहते हैं पुतिन?

रूसी राष्ट्रपति परमाणु फोर्स को अलर्ट करने का मकसद क्या हो सकता है? दरअसल, जिस तरह से पश्चिमी देशों और नाटो ने यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई करने और मदद करने का फैसला किया है, वह रूस को उकसा रहा है। अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध भी लगा दिए हैं। इसमें राष्ट्रपति पुतिन और कई बड़े नेताओं की संपत्तियों को जब्त करने का फैसला भी है। पुतिन ने रविवार को रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु और चीफ ऑफ स्टाफ वालेरी गेरासिमोव के साथ बैठक के दौरान परमाणु फोर्स को अलर्ट मोड में करने का आदेश दिया है। इसका साफ मतलब है कि अगर स्थिति बिगड़ी तो रूस परमाणु हमला करने से भी नहीं हिचकेगा।
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क्या डर का माहौल बनाना चाहता है रूस?
रूस के परमाणु अलर्ट का अमेरिका और नाटो ने कड़ा विरोध किया है। नाटो ने कहा है कि रूस इसके जरिए पूरी दुनिया में डर का माहौल बनाना चाहता है। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान पर दो परमाणु बम गिराए थे। उस हमले का दंश हिरोशिमा और नागसाकी आज भी झेल रहा है। ऐसे में रूसी अलर्ट ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। अगर रूस परमाणु हमले का दुस्साहस करता है तो इसका परिणाम कल्पना से परे होगा।

क्या होता है परमाणु निवारक बल?
द्वितीय विश्वयुद्ध (Second World War) के बाद कभी दुनिया ने परमाणु युद्ध नहीं झेला है लेकिन इन हथियारों की होड़ अभी तक जारी है। रूस और अमेरिका जैसे देशों के पास सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं। ये देश इन हथियारों के रख-रखाव और प्रयोग के लिए अलग यूनिट्स बना चुके हैं। वैसे तो इस बल के बारे में विशेष जानकारी तो सार्वजनिक नहीं है लेकिन माना जाता है कि न्यूक्लियर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का पहला कमांड सिस्टम है।
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कैसे काम करता है यह कमांड
शांति काल में परमाणु हथियार बल को इस तरह के अलर्ट पर नहीं रखा जाता है। ये बल इस दौरान लॉन्च करने वाले सर्किट को डिस्कनेक्ट कर देते हैं। लेकिन अगर इन्हें या रूस को लगता है कि उनपर कोई हमला हो सकता है या होने का खतरा है तो उस स्थिति में सर्किट को तार से फिर से कनेक्ट कर दिया जाता है। जब भी लॉन्च ऑर्डर आएगा ये तुरंत हमला कर सकते हैं। एक बार शुरुआती कमांड जारी कर दिया जाता है तो सिस्टम इसपर एक्टिव हो जाएगा। इस स्थिति में सिस्टम तभी हमला करेगा जब उसे लगेगा कि रूसी क्षेत्र में परमाणु हमला हुआ है या धमाका हुआ है। परमाणु बल को अलर्ट करने का ये मतलब नहीं होता है कि वह पहले हमला करेगा। यानी रूस पहले हमले की तैयारी नहीं कर रहा है। यह पहले हमला तभी करेगा या जब ऐसी कोई चेतावनी उसे मिलती है।

क्या पहले भी हुआ है ऐसा?
जहां तक इस तरह के अलर्ट का सवाल तो ऐसा पहले कभी दिखा नहीं है। परमाणु हथियारों की होड़ के दौरान या शीतयुद्ध के दौरान कभी भी परमाणु बल को इस तरह से अलर्ट नहीं किया गया था। ऐसे में दुनिया ने पहली बार इस तरह का अलर्ट देखा है।

रूस-अमेरिका के पास कितने परमाणु हथियार

जिस तरह से रूस ने परमाणु बल को अलर्ट मोड में किया है उससे साफ पता चलता है कि परमाणु हथियार बीतते वक्त के साथ दुनिया में शक्ति संतुलन को बदलने की क्षमता रखता है। रूस के पास अभी 6 हजार परमाणु हथियार हैं जबकि अमेरिका के पास 5,500 न्यूक्लियर वेपन हैं। ये हथियार अगर इस्तेमाल हो जाएं तो करोड़ों लोगों को मौत की नींद सुला सकते हैं। इन हथियारों के जरिए दुनिया को डराने का भी काम होता है।
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तो दुनिया में हो जाएगा परमाणु युद्ध?
हार्वर्ड केनेडी स्कूल में प्रोफेसर और पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन (Bill Clinton) के विज्ञान और तकनीक नीति के पूर्व सलाहकार मैथ्यू बन ने बताया, ‘मुझे नहीं लगता की यूक्रेन की लड़ाई में परमाणु हथियार का प्रयोग होने वाला है।’ इसकी मुख्य वजह ये है कि अमेरिका और नाटो ने साफ कर दिया है कि वे यूक्रेन में अपनी सेना नहीं भेजेंगे। अगर रूस में कोई सैन्य हमला नहीं होता है तो पुतिन इसका इस्तेमाल नहीं करने वाले हैं। वैसे भी यूक्रेन की तुलना में रूस की सैन्य ताकत काफी मजबूत है। बोस्टन यूनिवर्सिटी में वैश्विक अध्ययन के वरिष्ठ लेक्चरर पॉल हेयर ने कहा कि रूस का मुख्य मकसद यूक्रेन पर कब्जा करने और रूस की ऐतिहासिक ताकत को फिर से दुनिया को दिखाने का है। पुतिन का उद्देश्य दुनिया को परमाणु युद्ध में धकेलने का नहीं है।

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