सिंधिया के मंत्री बनने से बदलेगी मध्य प्रदेश भाजपा की राजनीति?   

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल के संभावित फेरबदल में ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम अकेला ऐसा नाम है जिन्हें मध्य प्रदेश कोटे से मंत्री पद की शपथ दिलाना तय माना जा रहा है. थावरचंद गहलोत को कर्नाटक का राज्यपाल बनाए जाने के बाद यह संभावना भी व्यक्त की जा रही है कि मध्यप्रदेश में सिंधिया के अलावा किसी एक अन्य चेहरे को भी मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है. यह चेहरा कैलाश विजयवर्गीय का भी हो सकता है और जबलपुर के सांसद राकेश सिंह का भी.

थावरचंद गहलोत मध्य प्रदेश के मालवा अंचल से हैं. उनकी उम्र 70 बरस को पार कर चुकी है. वे अनुसूचित जाति वर्ग के हैं. गहलोत वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं. इनका कार्यकाल अप्रैल 2024 में पूरा होना था. ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखकर अपने नए चेहरों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है. बताया जाता है कि गहलोत स्वयं राज्यपाल के पद पर जाने के इच्छुक थे, इस कारण प्रधानमंत्री ने उन्हें कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया है. गहलोत प्रधानमंत्री के करीबी मंत्रियों में माने जाते हैं. वे सामाजिक न्याय विभाग के मंत्री हैं. गहलोत मध्य प्रदेश के मालवा अंचल से हैं. इस कारण स्वाभाविक तौर पर मालवा को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं.

 

विजयवर्गीय को मिलेगा ईनाम?
मालवा के चेहरे के तौर पर पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का नाम चर्चा में है. पार्टी में सालों तक सुमित्रा महाजन का चेहरा मालवांचल का चेहरा रहा है. वे लोकसभा अध्यक्ष भी रही हैं. उनके रिटायरमेंट के बाद केंद्र में अब तक वैकल्पिक नाम सामने नहीं है. यद्यपि विजयवर्गीय अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं है. लेकिन, गहलोत के राज्यसभा का पद छोड़ने से विजयवर्गीय को सांसद बनने मैं कोई अड़चन नहीं आएगी. कैलाश विजयवर्गीय पार्टी महासचिव के तौर पर पश्चिम बंगाल के प्रभारी थे. पार्टी विजयवर्गीय को उनकी मेहनत का ईनाम किसी रूप में देना चाहेगी? जरूरी नहीं कि ईनाम केंद्रीय मंत्री बनाकर दिया जाए.  विजयवर्गीय के अलावा जबलपुर के सांसद राकेश सिंह को केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान मिलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है. राकेश सिंह पार्टी के मुख्य सचेतक भी रहे हैं. मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. वे महाकौशल अंचल का चेहरा हैं. वे चौथी बार के लोकसभा सदस्य हैं.

सिंधिया के मंत्री बनने से मध्यप्रदेश की राजनीति पर असर 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किए जाने से मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में भी कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं. पिछले साल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है. सिंधिया कांग्रेस नीत डॉक्टर मनमोहन सिंह की यूपीए-2 की सरकार में ऊर्जा मंत्री रह चुके हैं. सिंधिया पिछले साल मार्च में अपने 22 समर्थक विधायकों के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे. विधायकों के दलबदल करने के कारण ही कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का पतन हुआ था. 15 माह बाद भारतीय जनता पार्टी की सत्ता में वापसी हुई थी. शिवराज सिंह चौहान चौथी बार राज्य के मुख्यमंत्री बनाए गए. दलबदल के कारण बनी सरकार में सिंधिया का प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है. सरकार में उनके 14 मंत्री हैं. पार्टी ने संगठन में भी सिंधिया समर्थकों को समायोजित किया है. सिंधिया का प्रभाव ग्वालियर चंबल के अलावा मालवा मध्य भारत में भी है. उनका चेहरा पार्टी के अन्य नेताओं की तुलना में ज्यादा लोकप्रिय भी है. मध्यप्रदेश में कांग्रेस को कमजोर करने में सिंधिया की महत्वपूर्ण भूमिका पार्टी देख रही है. मोदी मंत्रिमंडल में उनकी एंट्री लंबे समय से अटकी हुई थी. कोरोना इसकी बड़ी वजह रहा है. सिंधिया के केंद्र में मंत्री बनने के बाद राज्य की राजनीति में और भी बदलाव आने से इनकार नहीं किया जा सकता. राज्य में पिछले कुछ दिनों से असंतुष्ट नेताओं के बीच मेल मुलाकातों का दौर चल रहा है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विरोधी लामबंद होने की कोशिश में लगे हुए हैं. राज्य के गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा विरोध के केंद्र में दिखाई दे रहे हैं. राज्य मंत्रिमंडल की बैठकों में भी मंत्रियों के बीच कतिपय मुद्दों पर टकराव की स्थिति बनी हुई हैं . ऐसा माना जाता है कि प्रधानमंत्री राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का समर्थन कर रहे हैं इस कारण असंतुष्टों की मुहिम परवान नहीं चढ़ पाई है. यह संभावना जरूर प्रकट की जा रही है कि पार्टी में संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ बड़े बदलाव आने वाले दिनों में देखने को मिल सकते हैं.
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)


First published: July 6, 2021, 3:55 PM IST

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