बार कोड गले में लटका घूमता है भिखारी, चिल्लर के बहाने पर कहता है- PhonePe करो.



डिजिटल तरीके से भीख मांगने का यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हो रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार डिजिटल तरीके से भीख मांगने वाला हेमंत सूर्यवंशी पहले नगर पालिका में काम करता था।

एक बहुत लोकप्रिय कहावत है कि मध्यप्रदेश गजब है। इसका जीता जागता उदाहरण मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में देखने को मिला है। जहां एक भिखारी सबसे अलग तरीके से भीख लेने के लिए बार कोड अपने गले में लटकाकर घूमता है और लोगों के द्वारा चिल्लर का बहाना नहीं होने पर कहता है कि फोन पे करो।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हेमंत सूर्यवंशी नाम का एक भिखारी गले में बार कोड और हाथ में मोबाइल लेकर डिजिटल तरीके से भीख मांगता है। अगर कोई व्यक्ति छुट्टे या चिल्लर नहीं होने के कारण भीख देने से इनकार करता है तो वह ऑनलाइन ट्रांसफर करने के लिए कहता है। वह लोगों से पैसे लेने के लिए अपने निराले अंदाज में कहता है कि अगर चिल्लर नहीं है तो फोन पे से भीख दे दो। 

डिजिटल तरीके से भीख मांगने का यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हो रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार डिजिटल तरीके से भीख मांगने वाला हेमंत सूर्यवंशी पहले नगर पालिका में काम करता था लेकिन किन्हीं वजहों से उसे नौकरी से हटा दिया गया। नौकरी जाने के बाद उसने भीख मांगना शुरू कर दिया। अब वह भीख मांग कर ही अपना जीवन यापन करता है।

इससे पहले बिहार के भी एक डिजिटल भिखारी का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। बेतिया स्टेशन पर भीख मांगने वाला भिखारी राजू डिजिटल तरीके से भीख मांगकर चर्चा में आ गया। राजू अपने एक हाथ में क्यू आर और बार कोड एवं दूसरे हाथ में टैब लेकर चलता है। राजू का दावा है कि वह देश का पहला भिखारी है जो डिजिटल तरीके से भीख लेता है।

बचपन से ही बेतिया में भीख मांगकर अपना गुजर बसर करने वाले राजू को शुरू में लोग छुट्टे नहीं होने की बात कहकर भीख देने से मना कर दिया करते थे। लेकिन जब राजू को डिजिटल पेमेंट का पता चला तो उसने आधार कार्ड और पैन कार्ड की सहायता से अपना बैंक अकाउंट खुलवाया। हालांकि इसके लिए भी राजू को काफी मशक्कत करनी पड़ी। जिसके बाद उसने डिजिटल पेमेंट ऐप पर अपना अकाउंट बनाकर ऑनलाइन तरीकों से भीख लेना शुरू कर दिया।        

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