नई दिल्लीः लोकपाल की Demand पर बनाई सरकार, पर 2020 से राजधानी में नहीं लोकायुक्त- केजरीवाल सरकार के खिलाफ HC में अपील



नई दिल्लीः याचिका में कहा गया है कि आप ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में लोकपाल विधेयक लाने का वादा किया था। लेकिन केजरीवाल सरकार 1995 के अधिनियम के तहत लोकायुक्त की नियुक्ति भी नहीं कर रही है।

राजधानी दिल्ली में लोकायुक्त की नियुक्ति में देरी का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर आप सरकार को एक महीने के भीतर लोकायुक्त नियुक्त करने का निर्देश देने की मांग की गई है। वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कहा कि ऐतिहासिक भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद आम आदमी पार्टी अस्तित्व में आई थी, लेकिन लोकायुक्त का पद दिसंबर 2020 से खाली पड़ा है।

बीजेपी के नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि अरविंद केजरीवाल अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद सत्ता में आए थे। लेकिन दिसंबर 2020 से लोकायुक्त का पद खाली पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार रिश्वतखोरी, काला धन, बेनामी संपत्ति, कर चोरी, मुनाफाखोरी समेत अन्य आर्थिक अपराध को खत्म करने के लिए कदम नहीं उठा रही है। लिहाजा अदालत को लोकायुक्त की नियुक्त के मामले में दखल देना पड़ेगा। ये इस समय की बड़ी जरूरत है।

अश्विनी उपाध्याय ने याचिका में कहा कि जस्टिस रेवा खेत्रपाल के दिल्ली लोकायुक्त के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद से सरकार ने आज तक इस पद पर नियुक्ति के लिए कुछ नहीं किया। भ्रष्टाचार से संबंधित सैकड़ों शिकायतें कार्यालय में लंबित हैं। याचिका में कहा गया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी-बड़ी बातें करने वाली आप सरकार लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं कर रही है। जबकि केजरीवाल खुद को बेहद ईमानदार बताते हैं।

याचिका में कहा गया है कि आप ने 2015 और 2020 के चुनावी घोषणा पत्र में कड़ा और प्रभावी जन लोकपाल विधेयक लाने का वादा किया था। कानून तो दूर की बात है, केजरीवाल सरकार 1995 के अधिनियम के तहत लोकायुक्त की नियुक्ति भी नहीं कर रही है। उनके अपने विधायकों के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़ी सैकड़ों शिकायतें लोकायुक्त कार्यालय में लंबित हैं।

ध्यान रहे कि अन्ना हजारे के आंदोलन के बाद लोकपाल की नियुक्ति के लिए केजरीवाल ने मुहिम भी चलाई थी। दिल्ली में सरकार बनाने पर उनका वायदा था कि लोगों को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने के लिए वो इस मोर्चे पर काम करेंगे। हालांकि, वो पांच चुनावी सूबों में भ्रष्टाचार को लेकर बातें कर रहे हैं अलबत्ता उनके अपने राज्य में ही लोकायुक्त का पद खाली पड़ा है।

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