Russia-Ukraine War: यूक्रेन में दहशत के बीच… -5 डिग्री में चले 35 किलोमीटर, चोक पोस्ट पर रोके गए भारतीय छात्रों ने कहा- अब हम कहां जाएं


नई दिल्ली: यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अब भी काफी संख्या में भारतीय छात्र (Indian Students in Ukraine) वहां मुश्किल हालात में फंसे हुए हैं। भारतीय छात्रों को वापस लाने के लिए सरकार की ओर से अभियान चलाया गया (Operation Ganga) है बावजूद इसके अब भी कई छात्र बड़े ही मुश्किल हालात में हैं। कड़ाके की ठंड जहां पारा शून्य से भी नीचे है, इस मुश्किल हालात में 35 किलोमीटर पैदल चलकर जब कई छात्र यूक्रेन-पोलैंड बॉर्डर(Ukraine Poland Border) के पास पहुंचे तब उन्हें चेकपोस्ट पर रोक लिया गया है। इन छात्रों को वापस जाने के लिए कहा जा रहा है। जो वीडियो सामने आया उसमें छात्र यह कह रहे हैं एडवाइजरी जो जारी की गई उसको फॉलो किया लेकिन अब हम क्या करें।

एक भारतीय छात्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए यह कह रहा है कि एंबेसी की ओर से जो एडवाइजरी जारी की गई उसको फॉलो करते हुए हम सभी पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचे हैं और यहां हमें रोक लिया गया है। अब हम क्या करें। छात्र ने बताया कि हम चेरनोबिल से यहां पहुंचे हैं हमें वहीं वापस जाने को कहा जा रहा है जबकि वहां बमबारी शुरू है। एक दूसरे छात्र ने कहा कि माइनस -5 डिग्री तापमान में हम पैदल चलकर यहां आए हुए हैं। यूक्रेनी चेकपोस्ट पर हमें रोक लिया गया है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि ऐसे भारतीय छात्रों की संख्या काफी अधिक है।

एक दूसरी छात्रा ने बताया कि एंबेसी की ओर से हमें रेस्क्यू करने के लिए जो भी नियम बताए गए थे उसको वैसे ही हम सभी ने फॉलो किया। हमें बताया कि बसें नहीं है तो हम सभी ने प्राइवेट व्हीकल के जरिए, पैदल चलकर यहां तक पहुंचे हैं। रात 12 बजे ही पहुंच गए थे और सुबह होने तक हम यही खड़े हैं तापमान गिर रहा है। बच्चों की तबीयत खराब हो रही है। यूक्रेन चेकपोस्ट खोला नहीं जा रहा है और हमें कारण भी नहीं बताया जा रहा है।


रूस की ओर से यूक्रेन पर की जा रही सैन्य कार्रवाई की वजह से वहां फंसे भारतीय छात्र भोजन और नकदी के संकट से जूझ रहे हैं। खारविक शहर में फंसी केरल की 21 वर्षीय छात्रा शना शाजी ने फोन पर बताया, हमारे पास केवल आज के लिए खाना बचा।उसने बताया कि उन्होंने मेट्रो बंकर में शरण ली है। बाहरी दुनिया से केवल मोबाइल फोन के जरिये जुड़ी शाजी ने बताया कि वह नहीं जानती कि बाहर क्या हो रहा है। उन्होंने बताया कि यह सोचकर की हालात थोड़े बेहतर हुए हैं, उन्होंने मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलने की कोशिश की लेकिन सड़क पर सैन्य वाहनों को देखते के बाद वापस स्टेशन के भीतर चली आईं।

यूक्रेन में कई लोग बंकर में फंसे हैं जबकि कई पैदल ही सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। शाजी ने बताया कि उनके कुछ दोस्त पोलैंड के लिए रवाना हुए है। उन्होंने बताया मेरा उनसे संपर्क टूट गया है। मुझे नहीं पता वे कहा हैं। एक दोस्त ने संदेश भेजा कि वह पोलैंड के लिए रवाना हो रहे हैं, उसके बाद से कोई संपर्क नहीं है। मदद का इंतजार नहीं करने का फैसला करने वालों में 19 वर्षीय मनोज्ञा बोरा भी है। वह अपने दोस्तों के साथ पश्चिमी यूक्रेन के लविव शहर से सीमा के लिए रवाना हुई।
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बोरा ने बताया,भारतीय दूतावास के परामर्श के आधार पर दोपहर 11 बजे पोलैंड के पहले सीमा प्रवेश मार्ग रवा-रुस्का पहुंचे। हम आठ किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जिसके बाद हम लौट आए और दूसरे शहर करीब 18 से 20 किलोमीटर पैदल चलकर गए। बोरा ने बताया कि वह यह देखकर हैरान थी कि बड़ी सख्ंया में लोग सीमा पार करने के लिए वहां मौजूद थे।

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