कार-बाइक की कीमतों में उछाल के लिए रहें तैयार, इस वजह से 10000 रुपये तक हो सकती हैं महंगी


रूस का यूक्रेन पर हमला (Attack on Ukraine) भारतीय निजी वाहन खरीदारों (Indian Personal Vehicle Buyers) के लिए दोहरा झटका साबित हो सकता है। एक तरफ बढ़ती इनपुट लागत (Rising Input Cost) के कारण कीमतें बढ़ सकती हैं। वहीं दूसरी तरफ सेमीकंडक्टर सप्लाई (Semiconductor Supply) में और रुकावटों के अनुमान के चलते उपभोक्ताओं के लिए वाहनों का वेटिंग पीरियड और बढ़ जाएगा। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि वाहन निर्माताओं का कहना है कि अभी तक कोई प्रभाव नहीं देखा गया है और स्थिति पर करीब से नजर रखी जा रही है। इनपुट लागत जो कम होने के संकेत दे रही थी, उसमें अब अचानक से उछाल आ सकता है। इसकी वजह है कि सात साल में पहली बार कच्चे तेल की कीमत (Crude Oil Prices) ने 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार किया और एल्यूमीनियम रिकॉर्ड हाई प्राइसेज को हिट कर रहा है।

​सबसे तेज उछाल रोडियम में

वाहन निर्माण में एल्यूमीनियम एक प्रमुख सामग्री है। रोडियम, प्लेटिनम और पैलेडियम जैसी कीमती धातुओं की कीमतें, जो ऑटोमोबाइल में उत्प्रेरक कन्वर्टर्स में उपयोग की जाती हैं, 30-36 सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। रूस और पूर्वी यूरोप इनमें से कुछ सामग्रियों के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। सबसे तेज उछाल रोडियम में है, जहां पिछली तिमाही के औसत की तुलना में मौजूदा तिमाही में कीमत 30% अधिक है। एल्युमीनियम, जो कुल कच्चे माल की लागत का लगभग 10-15% है, इस तिमाही में 20% महंगा हो गया है। यह लगभग 250 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर ट्रेड कर रहा है।

​मेकर्स के राजस्व का 78-84% लग जाता है कच्चे माल की लागत में

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वाहन निर्माताओं के राजस्व का लगभग 78-84% कच्चे माल की लागत में चला जाता है। कच्चे माल की उच्च लागत के बीच, ग्रॉस मार्जिन 27-32% के दीर्घकालिक औसत से 8-10% कम रहा है। ग्रॉस मार्जिन यह दर्शाता है कि कच्चा माल लाभप्रदता को कैसे प्रभावित करता है। मुद्रास्फीति में संभावित तेजी से ब्याज दरें सख्त हो सकती हैं, जिससे खरीदारों के लिए व्हीकल एक्वीजीशन कॉस्ट बढ़ सकती है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने रिसर्च फर्म टेकसेट का हवाला देते हुए कहा है कि यूक्रेन ने अमेरिका के सेमीकंडक्टर-ग्रेड नियॉन के 90% से अधिक की आपूर्ति की। नियॉन, चिप बनाने की प्रक्रिया में उपयोग किए जाने वाले लेजरों के लिए एक गैस इंटीग्रल है, जबकि रूस ने पैलेडियम की आपूर्ति का 35% हिस्सा दिया। पैलेडियम एक दुर्लभ धातु है, जिसका उपयोग सेमीकंडक्टर बनाने के लिए किया जा सकता है।

गहरा सकता है चिप संकट

टेकसेट की रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण अफ्रीका के साथ रूस भी वैश्विक स्तर पर पैलेडियम का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। पैलेडियम की कीमतें गुरुवार को 7% से अधिक उछल गईं। जेपी मॉर्गन के अनुसार पैलेडियम जैसे तत्वों के निर्यात को बाधित करने वाला एक फुल स्केल संघर्ष, चिपमेकर इंटेल जैसे कंपनियों को प्रभावित कर सकता है, जो पूर्वी यूरोप से अपने नियॉन का लगभग 50% प्राप्त करती है। यह सेमीकंडक्टर की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर सकता है और भारत भी प्रभावित होने की संभावना है। पहले से ही मलेशिया में क्षेत्रीय मुद्दों ने भारत को चिप की आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिससे ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माण प्रभावित हुआ है। हाल के महीनों में आपूर्ति की स्थिति में सुधार हो रहा था, लेकिन मौजूदा संकट अब कमी को और बढ़ा सकता है।

​कच्चे माल की लागत में 4-5% की वृद्धि का अनुमान

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विशेषज्ञों के अनुसार, अकेले कीमती धातुओं की ऊंची कीमतों से दोपहिया और यात्री कारों की कच्चे माल की लागत में 4-5% की वृद्धि होगी। एक घरेलू ब्रोकरेज हाउस के एक ऑटो विश्लेषक का कहना है कि इसके अलावा, एल्युमीनियम की बढ़ती कीमतों और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से माल और टायर पर असर, संचयी रूप से मार्जिन को 200-200 आधार अंकों तक प्रभावित कर सकता है। इसका मतलब है कि कच्चे माल की ऊंची लागत की भरपाई के लिए यात्री कार और दोपहिया वाहनों की कीमतों में क्रमशः 10,000 रुपये और 700 रुपये प्रति यूनिट की बढ़ोतरी हो सकती है।

पिछले एक साल में वाहनों की कीमतें पहले ही 10-15% बढ़ चुकी हैं और भारत में पहले से ही 5 लाख ग्राहक ऐसे हैं, जो अपनी बुक हो चुकी कारों को घर लाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कीमत वृद्धि के कारण यात्री वाहनों के हैचबैक और कॉम्पैक्ट सेडान सेगमेंट एसयूवी सेगमेंट से अधिक प्रभावित हो सकते हैं।

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