Russia Ukraine War Weapons: यूक्रेन रवाना हुआ फेफड़े फाड़ने वाला रूसी रॉकेट लॉन्चर TOS-1, बदल चुका है कई जंगों की तस्वीर


मॉस्को: यूक्रेन के साथ जारी लड़ाई के बीच रूस ने टीओएस-1 बुराटिनो (TOS-1 Buratino) रॉकेट लॉन्चर्स को तैनात करना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि ये थर्मोबैरिक रॉकेट लॉन्चर (Thermobaric Rocket Launcher) दुश्मन सैनिकों के आंतरिक अंग फेफड़ों को फाड़ सकते (Russia Death Machines) हैं। इनकी कुछ यूनिट को हाल में ही यूक्रेन की तरफ जाते हुए देखा गया है। यह रूस का सबसे घातक गैर परमाणु हथियार है। दावा किया जा रहा है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन पर जल्द से जल्द कब्जा करना चाहते हैं। उन्हें अनुमान था कि यूक्रेन के साथ लड़ाई एक से चार दिनों में जीती जा सकती है। लेकिन, पश्चिमी देशों के समर्थन और नाटो के हथियारों के दम पर यूक्रेनी सैनिक पीछे हटने को राजी नहीं हैं। पिछले 24 घंटे से भी ज्यादा समय से रूसी सेना यूक्रेन की राजधानी कीव पर कब्जे की कोशिश कर रही है, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली है। ऐसे में पुतिन का आदेश है कि चारों तरफ से हमले की तादाद को बढ़ाकर यूक्रेन को जल्द से जल्द घुटनों पर ला दिया जाए।

ट्रक पर लादकर यूक्रेन जाता दिखा यह हथियार
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, इस रॉकेट लॉन्चर को बेलगोरोड के पास यूक्रेन की ओर जा रहे एक ट्रक के ऊपर लदा हुआ देखा गया है। रूसी भाषा में TOS का मतलब तेज आग की लपटे फेंकना होता है। टीओएस-1 बुराटिनो एक फ्यूल एयर एक्सप्लोसिव से हमला करने वाला रॉकेट लॉन्चर है। पश्चिमी देशों ने भी आशंका जताई है कि रूस अब यूक्रेन पर कब्जा करने के लिए खतरनाक हथियारों की तैनाती कर रहा है। रूसी सेना को अंदेशा नहीं था कि उसे यूक्रेन में भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। एक अधिकारी ने कहा कि मेरा डर यह है कि अगर रूस अपने समय-सीमा और उद्देश्यों को पूरा नहीं करता है, तो वे अंधाधुंध हिंसा करेगा। डिफेंस और नेशनल सिक्योरिटी के जानकार चार्ली गाओ ने कहा कि बुराटिनो और सोलेंटसेपेक एक सेना के लिए बहुत उपयोगी हथियार हैं। ये शहरी क्षेत्रों में लड़ाई के दौरान बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

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15 सेकेंड में 30 रॉकेट कर सकता है फायर
टीओएस-1 बुराटिनो सोवियत संघ के जमाने का मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर है। यह हथियार 1988 से रूसी सेना में तैनात है। इस हथियार का इस्तेमाल रूस, अजरबैजान, आर्मीनिया, अल्जीरिया, सीरिया और इराक की सेना करती है। इस रॉकेट लॉन्चर ने सोवियत अफगान युद्ध, नागोर्नो काराबाख युद्ध, दूसरा चेचेन युद्ध, इराक युद्ध (2013-2017), सीरियाई गृहयुद्ध, डोनबास युद्ध, 2020 के नागोर्नो काराबाख युद्ध में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। इस हथियार को सोवियत संघ के जमाने की हथियार निर्माता कंपनी ओम्स्क ट्रांसमाश डिजाइन ब्यूरो ने 1988 में बनाया था। इस हथियार का वजन 43 टन, लंबाई 9.5 मीटर, चौड़ाई 3.6 मीटर, और ऊंचाई 2.22 मीटर है। इसे ऑपरेट करने के लिए तीन चालक दल की जरूरत पड़ती है। इसमें 220 एमएम कैलिबर का रॉकेट इस्तेमाल किया जाता है। यह रॉकेट लॉन्चर 15 सेकेंड में 30 राउंड रॉकेट दाग सकता है। इसका प्रभावी फायरिंग रेंज 500 से 3500 मीटर माना जाता है।

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दूसरे चेचन्या युद्ध में बरपाया था कहर
1999 और 2000 के बीच दूसरे चेचन्या युद्ध में इस हथियार ने अपनी जबरदस्त ताकत का प्रदर्शन किया था। इसी हथियार के दम पर रूसी सेना ने प्रांतीय राजधानी ग्रोज्नी पर कब्जा जमाया था। एक घटना में TOS-1 के हमले में 37 नागरिकों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए थे। इसका विस्फोट बिल्डिंग या किसी बंकर में बैठे सैनिक को भयानक तरीके से मार या अपंग बना सकता है। सैन्य विशेषज्ञ सेबेस्टियन रॉबलिन ने बताया कि एक एक TOS-1 रॉकेट सिस्टम 200 बाई 300 मीटर ब्लास्ट ज़ोन के भीतर सब कुछ मिटा देगा। इसके रॉकेट का विस्फोट आंतरिक हड्डियों को तोड़ सकता है। इससे आंखों पर इतना प्रेशर पड़ता है कि वे फूट जाती हैं। इससे शरीर के अंदरूनी अंगों में खून बहने लगता है। इतना ही नहीं, यह रॉकेट सिस्टम कान के पर्दे, आंत और अन्य आंतरिक अंगों को फाड़ सकता है।

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