Ukraine Crisis : यूक्रेन से आने वाले झारखंड के लोगों को हेमंत सरकार देगी टिकट का पैसा, अभी 86 नागरिकों के फंसे होने की सूचना


रवि सिन्हा, रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने कहा है कि यूक्रेन संकट (Ukraine Crisis) के बीच वहां से अपने निजी खर्च पर झारखंड वापस आने वाले नागरिकों के टिकट का पैसा देने का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार उनके टिकट पैसा रिम्बर्स (प्रतिपूर्ति) करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार, केंद्र के साथ मिलकर सभी झारखंडवासियों को हरसंभव मदद पहुंचाने का काम कर रही है। वहीं श्रम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार यूक्रेन में अभी झारखंड के 86 नागरिक फंसे हुए हैं। इनमें सबसे अधिक 23 लोग रांची के रहने वाले हैं।

यूक्रेन में फंसे झारखंड के 86 नागरिकों की सूचना मिली
यूक्रेन में बने नए गतिरोध के बीच झारखंड के भी दर्जनों लोग मुश्किल में फंसे हैं। यूक्रेन में फंसे छात्र और प्रोफेशनल्स और उनके परिजनों की ओर से लगातार स्टेट माइग्रेंट कंट्रोल रूम में सूचना देकर मदद मांगी जा रही है। श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण और कौशल विकास विभाग की ओर से संचालित कंट्रोल रूम में अब तक यूक्रेन में फंसे 86 लोगों ने खुद या उनके परिजनों ने संपर्क किया है। इनमें 24 महिलाएं और 62 पुरूष शामिल हैं।

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ऐसे मिली झारखंड के लोगों की जानकारी
श्रम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार यूक्रेन में फंसे 86 में से सबसे अधिक 23 लोग रांची के रहने वाले हैं। हजारीबाग और साहिबगंज के 11-11, पूर्वी सिंहभूम के 10, गोड्डा के 7, बोकारो के 3, गढ़वा के 3, चान्हो के, दुमका, लातेहार, पलामू और रामगढ़ के दो-दो और देवघर, खूंटी , कोडरमा और पश्चिमी सिंहभूम के एक-एक निवासी शामिल हैं। रांची की 13 युवती और महिलाओं, बोकारो और पूर्वी सिंहभूम की दो-दो, देवघर, दुमका, गोड्डा,हजारीबाग, खूंटी, पलामू और रामगढ़ जिले की एक-एक महिला सदस्य शामिल हैं।

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यूक्रेन में फंसे लोगों को हरसंभव मदद का वादा
इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को भी यूक्रेन में पढ़ने या रोजगार के लिए गये झारखंडवासियों और उनके परिवारजनों से यह आग्रह किया था कि वो कंट्रोल रूम के फोन नंबर पर संपर्क कर जानकारी दें। राज्य सरकार की ओर से केंद्र के साथ मिलकर सभी को हरसंभव मदद प्रदान की जाएगी।

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सहायता की अपील के बाद लिया गया फैसला
मुख्यमंत्री के इस आग्रह के बाद शुक्रवार से ही विभिन्न लोगों की ओर से यह आग्रह किया जा रहा था कि झारखंड सरकार ने कोरोना संक्रमण की पहली लहर और संपूर्ण लॉकडाउन के दौरान जिस तरह से अपने खर्चे पर ट्रेन, हवाई जहाज या अन्य वाहनों से प्रवासी श्रमिकों को वापस लाने का काम किया था। उसी तरह से इस संकट की घड़ी में भी यूक्रेन में फंसे लोगों को सुरक्षित वापस लाने का काम राज्य सरकार अपने खर्चे पर करें। संभवतः मुख्यमंत्री ने लोगों की इसी मांग को देखते हुए यह फैसला लिया है।

लाखों प्रवासी श्रमिकों की लॉकडाउन में हुई थी वापसी

साल 2020 में कोविड-19 पर अंकुश को लेकर देश में जब पहली बार संपूर्ण लॉकडाउन लगा था, तो देश में झारखंड ही ऐसा पहला राज्य था, जिसने प्रवासी श्रमिकों, बाहर पढ़ने वाले विद्यार्थियों और इलाज कराने गये लोगों को स्पेशल ट्रेन के माध्यम से वापस झारखंड लाने का काम किया था।

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