Pro Kabaddi League: पवन सेहरावत 200 पॉइंट बनाने वाले इकलौते रेडर, प्लेऑफ की रेस में दिल्ली, बेंगलुरु, पटना आगे


प्रो कबड्डी लीग (Pro Kabaddi League) का सीजन 8 अब तक बेहद अनिश्चित दिखाई दे रहा है, वजह यह कि कोई भी टीम क्लियर कट लीडर नहीं है. अब तक बेंगलुरु बुल्स, पटना पायरेट्स और दबंग दिल्‍ली के बीच टॉप की जंग कायम है और ज्यादातर यही टीमें शिखर से ऊपर नीचे होती रही हैं. हालाकि एक ही मैच मे इनके प्रदर्शन मे बेहद उतार चढ़ाव थोड़ा चौकाने वाला भी है. ज्यादातर टीमें अब तक 14 मैच खेल चुकी हैं और उन्हे प्ले ऑफ में जाने से पहले 8-8 मैच और खेलने होंगे. यानि तकरीबन दो तिहाई सफर पूरा हो चुका है. पटना पायरेट्स, हरियाणा स्टीलर्स और यूपी योद्धा एक यूनिट की तरह खेल रही हैं, जिसमे बड़े नाम या तो नहीं है, या उन पर निर्भरता नहीं है.

प्रदीप नरवाल की मौजूदगी के बावजूद यूपी उन पर अकेले निर्भर नहीं है, अगर होती तो मुश्किल में होती, लेकिन शुक्रवार को जिस पटना ने तमिल तलाइवाज को 52-24 से रौंद दिया, उसी 3 बार की चैंपियन टीम को एक दिन के फासले से जयपुर पिंक पैंथर्स ने 51-30 से शिकस्त दे दी. पटना और तमिल के मुकाबले में 4 हाई फाइव लगे.

पटना का माना जाता था सर्वश्रेष्‍ठ डिफेंस
ऐसा प्रो कबड्डी के इतिहास मे इससे पहले सिर्फ 3 बार हुआ था, जब किसी एक मैच मे डिफेंडर्स ने 4 हाई फाइव लगाए हो. इनमे 3 हाई फाइव पटना की डिफेंस नीरज, सुनील और मोहम्मद रेज़ा ने लगाए. पटना का प्रो कबड्डी के इतिहास मे डिफेंस में अब तक का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था, लेकिन हैरत की बात यह कि वही पटना जयपुर पिंक पैंथर्स के साथ हुए मुकाबले मे डिफेंस में बमुश्किल सिर्फ 4 पॉइंट्स ले सके, जिसमे अकेले सुनील के 3 पॉइंट्स शामिल हैं. इतना ही नहीं बेंगलुरु बुल्स इससे पहले तमिल थलाइवाज को लगातार 7 बार हरा चुका है, लेकिन कल रात पटना से एकतरफा हारी थलाइवाज ने बुल्स को आसानी से 42-24 से हरा दिया.

सपोर्ट मैनेजमेंट हुआ मजबूत
आखिर किसी भी टीम के प्रदर्शन में सिर्फ एक या दो दिन में इतना बड़ा फर्क कैसे आ जाता है. एक ही टीम किसी एक मुकाबले में अपना वर्चस्व साबित करती है और अगले ही मुकाबले में उसकी बेचारगी झलकने लगती है. दरअसल कबड्डी का खेल, प्रो कबड्डी के जरिए अब काफी परिपक्व हो चुका है. 8 सीजन के दौरान टीमों के अंदर सपोर्ट मैनेजमेंट मजबूत हुआ है. टीम के सपोर्ट स्टाफ में विश्लेषको की मौजूदगी प्रदर्शन को तकनीकी तौर पर प्रदर्शित करने में कामयाब होते हैं. कोच और खिलाड़ियों को वीडियोज के जरिए इस बात का अहसास होता है कि गलती कहां हुई है और उसे किस तरह दूर करना है. यही वजह है कि कोई भी टीम निरन्तरता के साथ प्रदर्शन नहीं कर पाती. पहले तीन स्थानों पर काबिज दिल्ली, बुल्स और पायरेट्स ने अब तक मिलकर 24 मैच जीते हैं, तो तीनों अब तक 15 मैच हार भी चुके हैं. इन टीमों के मिलाकर इतने मैच हारने के बाद भी टॉप थ्री में बने रहना इस बात का संकेत है कि दो तिहाई सफर पूरा करने के बाद भी लीग अब तक पूरी तरह खुली हुई है.

आखिर क्‍यों नहीं चल पाते बड़े खिलाड़ी
बड़े सितारों का नही चलना भी इसकी एक वजह है. दरअसल मैच से पहले बड़े खिलाड़ियों पर कोच इतना काम कर चुके होते हैं कि उनका रास्ता आसान नहीं होता. कुछ चोट से परेशान तो कुछ फॉर्म से परेशान बड़े सितारे सही मायने मे अपने नाम के साथ न्याय करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. प्रदीप नरवाल, राहुल चौधरी, रोहित कुमार, अजय कुमार, सिद्धार्थ देसाई ऐसे ही कुछ नाम है, जिन पर सीजन 8 में काफी दारोमदार था, लेकिन यह अपनी शोहरत के साथ न्याय नहीं कर पाए. अजय को तो टीम ने रिलीज भी कर दिया है. हां, लेकिन दूसरी ओर पवन सहरावत और नवीन कुमार भी हैं जो लगातार अबाध गति से चल रहे हैं और उम्मीद से बेहतर भी कर रहे हैं. नवीन घुटने की चोट से परेशान हैं और पिछले 5 मैच अपनी टीम के लिए नहीं खेल पाए हैं, गनीमत यह की उनकी गैर मौजूदगी में भी दिल्ली ने 2 मुकाबले जीते हैं और दिल्ली की पोजीशन पर कोई खास प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है. सुकून की बात यह कि नवीन की अब जल्द वापसी हो सकती है. संकेत है कि उनकी रिकवरी ठीक चल रही है और वह आज रात यू मुंबा के खिलाफ खेले जाने वाले मुकाबले में खेल भी सकते हैं.

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पहले 10 स्‍थानों पर टीमों के बीच 11 अंक का ही अंतर
प्लेऑफ का समय नजदीक आने के साथ ही टीमों के बीच जद्दोजहद बढ़ती जा रही है, जैसा की हमने पहले लिखा कि दो-तिहाई सफर पूरा करने के बाद भी पॉइंट्स टेबल मे पहले दस स्थानों पर काबिज टीमों के बीच फासला सिर्फ 11 पॉइंट्स यानि लगभग दो जीत का है. टॉप पर दिल्ली 48 पॉइंट्स के साथ है और 10वे नंबर पर पुणेरी पलटन 37 पॉइंट्स के साथ हैं, यानि अब भी इन दस टीमों के पास पहले 6 मे आने और प्ले ऑफ मे पहुंचने का मौका है. गुजरात जाएंट्स 11 वे और तेलुगू टाइटन्स आखिरी पायदान पर है. तकनीकी तौर पर या गणितीय समीकरण के आधार पर इनके पास भी मौका हो सकता है, लेकिन व्यावहारिक तौर पर ऐसा लगता है कि यह दोनों टीमे अब बाकी टीमों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं. वजह साफ की इनके पास खोने को बहुत कुछ नहीं है, लेकिन दूसरे की पार्टी खराब करने के लिए तो अब भी बहुत कुछ है.

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इस सप्‍ताह होगी असली जंग
लगातार तीसरे सीजन पवन सहरावत रेडर्स की लिस्ट मे सबसे आगे कायम है. 200 का आंकड़ा लांघने वाले वह इकलौते रेडर हैं. वॉरियर्स के मनिन्दर टीम का बोझ लगातार अकेले उठा रहे हैं. बीच बीच मे बाकी प्लेयर्स से भी थोड़ा स्पार्क देखने मिलता है. जिन खिलाड़ियों ने उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया है उनमे अर्जुन देशवाल (जयपुर), सुरिंदर गिल (यूपी), अभिषेक सिंह(मुंबा) और मंजीत(तमिल) शामिल है, लेकिन अगर आप डिफेंडर्स की फेहरिस्त देखें तो बिल्कुल नए चेहरे छाए हुए हैं. पहले 10 में 5 ऐसे खिलाड़ी हैं जो अपना पहला सीजन खेल रहे हैं. थलाइवाज के सागर अभी 54 टैकल पॉइंट्स के साथ टॉप पर हैं. पिछले सीजन भी कुछ मैच उन्होंने गुमनामी मे खेले थे, लेकिन जयदीप 49, ईरान के मोहम्मद रेज़ा शादुलु, साहुल कुमार और रिंकू शामिल हैं. जानें मानें डिफेंडर्स मे सुरजीत, नितेश,सुरिंदर नाड़ा और नीरज टॉप टेन मे काबिज हैं, जबकि फजल अत्राचाली, मंजीत छिल्लर, अबूज़ार मेघानी, परवेश भैंसवाल, विशाल भारद्वाज, संदीप नरवाल, गिरीश एरनाक, जीवा और जोगिंदर अपने नाम से न्याय नहीं कर पाए हैं. कुल मिलाकर यह सप्ताह विभिन्न टीमों के बीच असली जंग का होगा और इसके खत्म होते-होते प्ले ऑफ की शायद धुंधली तस्वीर भी दिखाई देने लगे.

Tags: Patna pirates, PKL, Pro Kabaddi League, Tamil thalaivas

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