VIP सुरक्षा पाने का कौन होता है हकदार और क्या होती है प्रक्रिया? समझें



हाल ही में हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है। जब हरियाणा सरकार ने राम रहीम को जेड प्लस स्तर की सुरक्षा देने का फैसला लिया तो देशभर में यह मुद्दा बना। क्योंकि राम रहीम दो महिलाओं से दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा काट रहा है और 20 फरवरी को पंजाब में चुनाव से पहले ही फर्लो पर जेल से बाहर आया है।

केंद्र सरकार ने यूपी व पंजाब के चुनावों के अंतर्गत करीब 25 भाजपा नेताओं को केंद्रीय सुरक्षा प्रदान की है। इनमें से यूपी में मैनपुरी की करहल सीट से सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ चुनाव लड़ रहे भाजपा उम्मीदवार एसपी सिंह बघेल का नाम भी शामिल है। साथ ही पंजाब के कई कांग्रेसी नेताओं को भी सुरक्षा दी गई है।

केंद्र या राज्य में सरकार से किसे सुरक्षा मिलती है: आम तौर पर किसी व्यक्ति के सरकार व जन सामान्य के बीच जीवन के खतरे के आधार पर वीआईपी सुरक्षा प्रदान की जाती है। केंद्र सामान्य तौर पर हर किसी को सुरक्षा नहीं देता है वह केवल महत्वपूर्ण लोगों को ही इस श्रेणी में रखता है जिनकी जान खुफिया एजेंसियों के आकलन के चलते खतरे में मानी जाती है। इसके अलावा, राज्य सरकार अपने आकलन के आधार पर सूबे के पुलिस बलों द्वारा सुरक्षा देता है।

केंद्र या राज्य ऐसे तय करता है व्यक्ति का सुरक्षा स्तर: किसी व्यक्ति की सुरक्षा का स्तर केंद्र में गृह मंत्रालय तो वहीं राज्यों के मामले में प्रदेश सरकार तय करती है। केंद्र सरकार, आईबी और रॉ जैसी खुफिया एजेंसियों से प्राप्त जानकारी तो राज्य सरकार अपने खुफिया विभाग के मूल्यांकन के आधार पर सुरक्षा स्तर तय करता है। हालांकि, सरकार में कई पद सुरक्षा की दृष्टि से इसके स्वतः हकदार होते हैं। इनमें प्रधानमंत्री व उनका परिवार, गृह मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैसे अधिकारियों के नाम शामिल होते हैं।

राम रहीम को क्यों मिली सुरक्षा: कानूनन, यदि सरकार को लगता है कि दोषी की जान को खतरा है तो उसे सुरक्षा प्रदान करने पर कोई रोक नहीं है। दरअसल यह राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वह कैदियों व दोषियों के जीवन की रक्षा करे। हालांकि, हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने हाल ही में कहा था कि उन्हें राम रहीम के खिलाफ किसी खतरे की जानकारी नहीं है।

हरियाणा के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की जानकारी के आधार पर डेरा प्रमुख राम रहीम को सुरक्षा दी गई थी। अधिकारी ने बताया था कि राम रहीम को भारत और विदेशों में कट्टरपंथी सिख चरमपंथियों से बड़े स्तर का खतरा है। इसके बाद ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राम रहीम को सुरक्षा प्रदान की थी।

मोटे तौर पर इतने प्रकार के हैं सुरक्षा स्तर: केंद्र और राज्यों की सरकारों द्वारा व्यक्तियों को दी जाने वाली सुरक्षा के विभिन्न स्तरों में एक्स, वाई, वाई प्लस, जेड, जेड प्लस और एसपीजी (विशेष सुरक्षा समूह) शामिल है। जबकि एसपीजी केवल प्रधानमंत्री और उनके परिवार के लिए है। वहीं, अन्य सुरक्षा श्रेणियां किसी को भी प्रदान की जा सकती हैं, जिनके बारे में केंद्र या राज्य सरकारों के पास खतरे के बारे में इनपुट है।

हालांकि, इस सुरक्षा श्रेणियों में भी कई तरह के स्तर हैं जिनमें निवास, मोबाइल वाहन सुरक्षा, कार्यालय और अंतर-राज्यीय सुरक्षा शामिल है। खतरे के आधार पर महत्वपूर्ण लोगों को अलग-अलग सुरक्षा स्तर दिए जाते हैं। जिनमें से कुछ को खतरा तभी हो सकता है जब वे यात्रा करते हैं, इसलिए उन्हें एक अनुरक्षक बल (एस्कॉर्ट) दिया जाता है।

इसके अलावा, साथ रहने व मोबाइल सुरक्षा के लिए अलग-अलग बल भी सुरक्षा देते हैं। जैसे कई लोगों को राज्य पुलिस द्वारा आवास सुरक्षा मिलती है लेकिन मोबाइल सुरक्षा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) द्वारा दी जाती है।

हालांकि, बीते कई सालों में केंद्र सरकार ने एनएसजी पर से वीआईपी सुरक्षा का बोझ का कम किया है। इसीलिए गृह मंत्री अमित शाह और एनएसए अजीत डोभाल को क्रमशः सीपीआरएफ और सीआईएसएफ का सुरक्षा स्तर दिया गया है। वहीं सरकार जिस किसी को भी सुरक्षा स्तर प्रदान करती है उसका भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। इसमें सुरक्षाकर्मियों के आवास वगैरह की व्यवस्था भी शामिल होती है।

कौन से बल जो वीआईपी सुरक्षा में लगे और कौन करता है भुगतान: प्रधानमंत्री के अलावा अन्य वीआईपी के लिए, सरकार ने सुरक्षा कवर प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को अनिवार्य कर दिया है। यदि कोई राज्य सुरक्षा प्रदान करता है, तो राज्य पुलिस सुरक्षा प्रदान करती है।

मुकेश अंबानी करते हैं इतना भुगतान: इसके अलावा, सरकार खतरे का आकलन करने के बाद भी सुरक्षा के लिए किसी निजी व्यक्ति को बिल देना चुन सकती है। जैसे आईबी की इनपुट के बाद उद्योगपति मुकेश अंबानी को 2013 में जेड श्रेणी सीआरपीएफ सुरक्षा देने के आदेश में कहा गया था कि सीआरपीएफ इस सुरक्षा स्तर के लिए अंबानी से 15 लाख रुपये प्रति माह चार्ज करेगी।

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