Russia-Ukraine War: NATO-नाटो सुनकर कान पक गए, जानते भी हैं क्या है ये?


कीव: रूस-यूक्रेन जंग (Russia-Ukraine War) में बार-बार NATO का नाम आ रहा है. यूक्रेन के राष्ट्रपति ने वलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) ने अमेरिका के साथ-साथ नाटो पर भी धोखा देने का आरोप लगाया है. माना जा रहा था कि इस जंग में यूएस और NATO यूक्रेन का साथ देंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. वहीं, रूस का कहना है कि यदि यूक्रेन नाटो का हिस्सा बनने की जिद छोड़ देता तो शायद उसका ये हाल नहीं होता.  ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर नाटो है क्या और क्यों रूस उससे इतना चिढ़ता है.

NATO और उसका मूल सिद्धांत 

नॉर्थ एटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन यानी NATO 1949 में बना एक सैन्य गठबंधन है, जिसमें शुरुआत में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और फ्रांस सहित 12 देश शामिल थे. इस संगठन का मूल सिद्धांत ये है कि यदि किसी सदस्य देश पर हमला किया जाता है तो बाकी देश उसकी मदद के लिए आगे आएंगे. इसलिए माना जा रहा था कि नाटो मुश्किल की घड़ी में यूक्रेन की मदद करेगा. मगर अब तक ऐसा देखने को नहीं मिला है.

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कितने देश हैं इसका हिस्सा?

इस संगठन का मूल मकसद दूसरे विश्व युद्ध के बाद रूस के यूरोप में विस्तार को रोकना था. 1955 में सोवियत रूस ने NATO के जवाब में पूर्वी यूरोप के साम्यवादी देशों के साथ मिलकर अपना अलग सैन्य गठबंधन खड़ा किया था, जिसे वॉरसा पैक्ट नाम दिया गया था. हालांकि, 1991 में सोवियत यूनियन के विघटन के बाद वॉरसा पैक्ट का हिस्सा रहे कई देशों ने पाला बदल लिया और नाटो का हिस्सा बन गए. NATO गठबंधन में अब 30 देश हैं.

ये वादा चाहते हैं पुतिन 

फिलहाल यूक्रेन NATO का सहयोगी देश है और उसके इस संगठन में शामिल होने की बातें चल रही हैं. जबकि रूस पश्चिमी देशों से वादा चाहता है कि ऐसा कभी नहीं होगा. हालांकि, अमेरिका और उसके सहयोगी देश यूक्रेन को नाटो में शामिल होने से रोकने के खिलाफ हैं. उनका तर्क है कि यूक्रेन एक स्वतंत्र राष्ट्र है जो अपनी सुरक्षा को लेकर निर्णय ले सकता है और किसी भी गठबंधन से जुड़ सकता है.

इस बात से नाराज है Russia

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दावा है कि पश्चिमी देश नाटो का इस्तेमाल रूस के इलाकों में घुसने के लिए कर रहे हैं. पुतिन चाहते हैं कि NATO पूर्वी यूरोप में अपनी सैन्य गतिविधियां रोक दे. उनका कहना है कि अमेरिका ने 1990 में किया वो वादा तोड़ दिया है जिसमें नाटो के पूर्व की तरफ नहीं बढ़ने की बात कही गई थी, लेकिन अमेरिका का कहना है कि उसने कभी ऐसा कोई वादा नहीं किया. उधर, नाटो का कहना है कि उसके कुछ सदस्य देशों की सीमाएं ही रूस से लगी हैं और ये एक सुरक्षात्मक गठबंधन हैं.

क्या कर रहा है NATO?

NATO क्षेत्र की पूर्वी सीमा के ठीक बगल में ये जंग चल रही है और संगठन के कई सदस्य देशों को लग रहा है कि रूस आगे उन पर हमला कर सकता है. इसके मद्देनजर नाटो ने सैकड़ों लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों को अलर्ट पर रखा है और रूस-यूक्रेन के सीमावर्ती इलाकों में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि नाटो अपनी रेस्पांस फोर्स को भी सक्रिय कर सकता है, जिसमें लगभग 40,000 सैनिक हैं.

 

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