Sharad Pawar: महाराष्ट्र खुफिया विभाग से खफा शरद पवार, सरकार में जल्द हो सकता है बड़ा फेरबदल, कई अफसर और मंत्री पर गिर सकती है गाज!


मुंबई: महाविकास अघाड़ी सरकार(Mahaviakas Aghadi News) के राज में जल्द ही बड़े बदलाव के संकेत हैं। भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि यह बदलाव नौकरशाही से लेकर सरकार तक में हो सकते हैं। महाविकास अघाड़ी सरकार के मुखिया शरद पवार(Sharad Pawar) और तमाम प्रभावशाली मंत्री इस बात से खासे नाराज हैं कि राज्य के कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक(Nawab Malik) की गिरफ्तारी से पहले सीआरपीएफ का इतना बड़ा मूवमेंट हुआ और राज्य के खुफिया विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। कई मंत्रियों ने और खुद शरद पवार ने गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटील को अपनी नाराजगी से अवगत कराया है। इधर, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे(Uddhav Thackeray) भी चाहते हैं कि राज्य की नौकरशाही में ऐसे अफसरों को तैनात किया जाए, जो केंद्रीय जांच एजेंसियों के मूवमेंट के बराबर मूवमेंट कर सकें।

कौन बनेगा सीएस?
महाराष्ट्र में पिछले दो बार से सीएस यानी मुख्य सचिव का पेंच फंसता आ रहा है। वर्तमान मुख्य सचिव देवाषीश चटर्जी का कार्यकाल 28 फरवरी को खत्म हो रहा है। देवाशीष चटर्जी को उस वक्त अचानक राज्य के मुख्य सचिव का कार्यभार अतिरिक्त तौर पर रात में दिया गया जब दिसंबर में तत्कालीन मुख्य सचिव सीताराम कुंटे के एक्सटेंशन की फाइल अप्रूव होकर दिल्ली से नहीं लौटी थी। इसके बाद देवाशीष चटर्जी को मुख्य सचिव पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई और उनके रिटायरमेंट के दो हफ्ते पहले ही उनको अधिकारिक तौर पर मुख्य सचिव की पूरी जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद सत्ता के गलियारे में चर्चा चलने लगी कि देवाशीष को कम से कम तीन महीने का सेवा विस्तार और दिया जाएगा। हालांकि मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि देवाशीष चटर्जी को सेवा विस्तार दिए जाने की फाइल अब तक दिल्ली भेजी ही नहीं गई है। यानी 28 फरवरी के बाद राज्य की ब्यूरोक्रेसी में बदलाव तय माना जा रहा है।

वैसे भी देवाशीष चटर्जी का पहले ही महाराष्ट्र एपीलेट ट्रिब्यूनल मेट के लिए सिलेक्शन हो चुका है। सवाल यह कि अगर देवाशीष मुख्य सचिव नहीं रहेंगे तो नया मुख्य सचिव कौन बनेगा? फिलहाल 3 नाम चल रहे हैं। जिनमें मनु कुमार श्रीवास्तव, सुजाता सौनिक और तीसरा उनके पति मनोज सौनिक का है। इन तीनों में सबसे सीनियर मनु कुमार श्रीवास्तव हैं। दरअसल, मुख्य सचिव की नियुक्ति के मामले में ठाकरे सरकार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है, क्योंकि डीजीपी संजय पांडे के मामले में वह अदालत से फटकार खा चुकी है।

मंत्रिमंडल में फेरबदल!
यह तो बात हुई ब्यूरोक्रेसी की दूसरी तरफ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले बार बार सरकार में फेरबदल की बात कर रहे हैं। यह बात अलग है कि पटोले की घोषणाओं को कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है लेकिन जिस तरह के हालात इन दिनों बने हुए हैं उसे देखते हुए यदि नवाब मलिक को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ता है तो कांग्रेस के बहाने ही शरद पवार और उद्धव ठाकरे अगर राज्य मंत्रिमंडल में फेरबदल करवा दे तो इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए। कहा जा रहा है कि शरद पवार की इच्छा जयंत पाटील को गृहमंत्री बनाने की है, लेकिन अजित पवार की वजह से यह संभव नहीं हो पा रहा है। हालांकि की बदली हुई परिस्थिति में हो सकता है कि अजित पवार भी इसके लिए राजी हो जाएं। इधर, आगामी मनपाओं के चुनाव के हिसाब से भी सरकार द्वारा प्रशासनिक ढांचे में फेरबदल करना तय माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि मार्च में प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल संभव है।

खाली होंगे कई पद
जल्द ही सीनियर ब्यूरोक्रेट के तौर पर वंदना कृष्णा और जयश्री बनर्जी भी रिटायर होनी है। साथ ही मार्च में मुंबई मनपा के चुनाव होने तक कोई प्रशासक बनाया जाना है। एमएसआरडीसी के चैयरमैन राधेश्याम मोपवलवार का भी कार्यकाल 28 फरवरी को खत्म हो रहा है। जबकि समृदधि महामार्ग के पहले चरण का उद्घाटन होना है। ऐसे में उनको भी सेवा विस्तार मिल सकता है। इसके अलावा सरकार म्हाडा, एमएमआरडीए और महामेट्रो जैसे कॉरपोरेशन के लिए भी नए चेहरे तलाश रही है।

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