अहमदाबाद ब्लॉस्टः कार चोरों का पीछा करते-करते जब मुंबई पुलिस इंडियन मुजाहिदीन तक जा पहुंची



मुंबईः फिलहाल रिटायर हो चुके अरुण चव्हान को इस केस की कमान क्राईम ब्रांच के तत्कालीन चीफ राकेश मारिया ने दी थी।

26 जुलाई 2008 में हुए अहमदाबाद सीरियल बम ब्लॉस्ट के बाद आईबी और रॉ जैसी एजेंसियों को भी कुछ सूझ नहीं रहा था। तब मुंबई पुलिस के एक इंस्पेक्टर ने कार चोरों का पीछा करते करते इंडियन मुजाहिदीन को बेनकाब कर दिया। फिलहाल रिटायर हो चुके अरुण चव्हान को इस कास की कमान क्राईम ब्रांच के तत्कालीन चीफ राकेश मारिया ने दी थी।

मारिया को पता चला था कि हमले में इस्तेमाल की गई कारें नवी मुंबई से चोरी की गई थीं। चव्हान कार चोरी से जुड़े मामलों को सुलझाने के एक्सपर्ट माने जाते थे। चव्हाण ने केस की कमान मिलने के बाद दो ऐसे लोगों की पीछा किया जिन्होंने 1 माह के भीतर दो वाहन चोरी किए थे। उन्होंने इंस्पेक्टर को बताया कि वो अफजल उस्मानी के इशारे पर ये काम कर रहे थे। चव्हाण ने उस्मानी को उसी साल अगस्त में यूपी के मऊ से अरेस्ट किया।

सूत्रों का कहना है कि उस्मानी ने पूछताछ के दौरान मुजाहिदीन के दूसरे लोगों जैसे रियाज भटकल, सादिक शेख, आरिफ बदर के बारे में बताया। उसने दिल्ली में आईएम के एक ग्रुप की भी जानकारी दी। इसके बाद ही बादला हाउस एनकाउंटर हुआ। आईबी के एक पूर्व अधिकारी ने कहा कि तब तक सभी अंधेरे को टटोल रहे थे। अगर चव्हाण नहीं होते तो हमें नहीं पता होता कि आईएम वास्तव में क्या है। इंडियन एक्सप्रेस से चव्हाण ने कहा कि उन्हें खुशी है कि हमारे प्रयासों के परिणामस्वरूप मामला तार्किक निष्कर्ष पर पहुंच गया है। उनका कहना था कि ज्यादातर बड़े मसलों मुद्दों को वास्तव में छोटी-छोटी कड़ियां जोड़कर ही हल किया जाता है।

हालांकि, चव्हाण की लीड से पहले गुजरात के सबसे बड़े बम धमाके की जांच के लिए पांच राज्यों की पुलिस जुटी थी। राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक की पुलिस ने कई शहरों में छापे मारे थे। इंडियन मुजाहिदीन ने ईमेल भेजकर ली थी जिम्मेदारी आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने कुछ मीडिया संस्थानों में ईमेल भेजकर इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। इसमें दावा किया गया था कि यह गोधरा दंगों और 1992 में जामा मस्जिद विध्वंस का बदला है।

गौरतलब है कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में एक के बाद एक सिलसिलेवार 21 धमाके हुए। इस केस में 13 साल बाद सजा का ऐलान हो गया है। कोर्ट ने 38 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है, जबकि 11 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। कुल 7015 पेज का फैसला है। इससे पहले सेशन कोर्ट ने 49 आरोपियों को दोषी करार दिया था। अदालत ने 77 में से 28 आरोपियों को बरी कर दिया था।

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