Road Traffic Safety: सिर्फ जिंदगी नहीं GDP को झटका देती हैं सड़क दुर्घटनाएं


नई दिल्ली: सड़क पर हो रहे हादसे देश की अर्थव्यवस्था (Economy) को नुकसान पहुंचाते हैं। जो सड़क ( Road ) देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती हैं, वहां होने वाले हादसे उसी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं। इन हादसों में जान गंवाने वाले लोगों से न केवल अपनों को दुख पहुंचता है, बल्कि देश की डीजीपी को भी झटका लगता है। रोड सेफ्टी ( Road Sefety) के मानकों का पालन कर हम न केवल अपनी जान बचा सकते हैं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान जारी रख सकते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि सबसे ज्यादा सड़क हादसे ओवर स्पीड के कारण ही होती है और सबसे ज्यादा दुर्घटना का शिकार बाइक सवार होते हैं। ट्रैफिक नियमों ( Traffic Rules) का अगर सही से पालन कर लें तो हम न केवल खुद को बल्कि देश की इकोनॉमी (Economy) को भी बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। अगर आसान भाषा में कहें तो जो सड़क किसी भी देश की तरक्की का आधार हैं, उसपर होने वाले हादसे उसकी अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत में होने वाले सड़क हादसों की लागत 5.96 लाख करोड़ रुपए थी, जो उसकी जीडीपी का 3.14 प्रतिशत हिस्सा था। वहीं वाहन कलपुर्जे बनाने वाली कंपनी बॉश ने साल 2021 में जारी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत में सड़क दुर्घटनाओं के चलते होने वाले कुल सामाजिक-आर्थिक नुकसान की रकम 15.71 से 38.81 अरब डॉलर तक है। ये नुकसान देश की अर्थव्यवस्था को झटका देते है।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक साल 2018 में ओवर स्पीड के कारण हर साल 6 लाख 38 हजार से अधिक हादसे ओवरस्पीड के कारण होते रहे। वहीं 65 हजार से अधिक हादसे आकस्मित कारणों से होते है। जबकि वहीं गलत दिशा में ड्राइविंग के कारण 53 हजार से अधिक हादसे होते हैं। वहीं शराब पीकर गाड़ी चलाने के कारण 26 हजार से अधिक हादसे होते रहे। रेड लाइट जंप करने के कारण हर साल 10 हजार से अधिक हादसे हो जाते हैं।

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सड़क हादसे में मरने वालों की संख्या के आधार पर बात करें तो साल 2014 के मुकाबले 2018 सड़क हादसे में मरने वालों की संख्या में गिरावट आई है। साल 2014 में सड़क दुर्घटना के कारण 7 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। ये आंकड़ा साल 2018 में गिरकर 4200 के करीब पहुंच गया है। सड़क सुरक्षा मानकों में सुधार और ट्रैफिक नियमों ( Traffic Rules) के पालन को लेकर लगातार हो रही सख्ती के कारण सड़क हादसे में होने वाली मौत में भारी गिरावट राहत की खबर है।

अगर कैटेगरी की बात करें तो सड़क दुर्घटना का सबसे ज्यादा शिकार बाइकर्स होते हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर साझा की गई जानकारी के मुताबिक टू व्हीलर्स से होने वाले हादसों का प्रतिशत 43.5 फीसदी है। वहीं 17.8 फीसदी हादसे पैदल चलने वाले लोगों के साथ हुए हैं। ऑटो रिक्शा से होने वाले हादसों की संख्या 3.9 फीसदी है। जबकि 3.2 फीसदी हादसे साइकिल सवारों के साथ हुए है। कार, टैक्सी से होने वाले सड़क हादसों का प्रतिशत करीब 14 फीसदी है तो सबसे कम सड़क हादसे बसों के साथ होते हैं। इनका प्रतिशत 2.3 फीसदी है। बाइक सवार अगर अपनी रफ्तार पर लगाम रखें और हेलमेट पहनकर तक सड़क पर निकले तो इन आंकड़ों को आसानी से कम किया जा सकता है।

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