गौशाला चलाना सरकार का काम नहीं, अब एनजीओ चलाएंगे-अखिलेश्वरानंद गिरी


जबलपुर. सत्ता की बयानबाजी का विषय रहे गौवंश के लिए बनाई नीतियों में सरकार फिर से बदलाव करने जा रही है. इसको लेकर मध्यप्रदेश गोपालन एवं पशु संवर्धन बोर्ड के उपाध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी का नया बयान सामने आया है. उन्होंने कहा गौवंश चलाना सरकार का काम नहीं है, सरकार सिर्फ अपने हिस्से का काम करेगी. ग्राम पंचायतें भी अनुभव ना होने के कारण गौशालाओं का संचालन नहीं कर पा रही हैं, ऐसे में इन्हें एनजीओ के हवाले करने का निर्णय लिया गया है.

मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार के दौरान 1000 गौशालाओं के निर्माण की घोषणा की गई थी. इसके बाद दोबारा सत्ता पर काबिज हुई शिवराज सरकार में 2000 नई गौशालाओं के निर्माण की बात हुई थी. कुल 3000 गौशालाओं के निर्माणाधीन होने के साथ-साथ ग्राम पंचायतों को 5 एकड़ जमीन में गौशालाओं की स्थापना कर उसके संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी. इससे पहले की तस्वीर मूर्त रूप लेती एक बार फिर गौवंश को लेकर नए नियम कायदे तैयार हो गए हैं.

सारी गौशालाओं को करेंगे एनजीओ के हवाले

आपके शहर से (जबलपुर)

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश


सरकार ने फैसला लिया है कि अब तमाम गौशालाओं को एनजीओ यानी गैर राजनीतिक संगठन संचालित करेंगे. सरकार ने हर गाय के लिए पहले से ही 20 रुपए प्रतिदिन का खाना पीना तय कर दिया था. तीन लाख गौवंश होने के दावे के साथ साल भर में 300 करोड़ के बजट की दरकार बताई थी. लेकिन अब मध्य प्रदेश गोपालन एवं पशु संवर्धन बोर्ड के उपाध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वर आनंद गिरी ने बयान दिया है. उनका कहना है गौशाला चलाना पहली बात तो सरकार का काम नहीं है. सरकार सिर्फ अपने हिस्से का काम करेगी. क्योंकि ग्राम पंचायतें भी अनुभव ना होने के चलते गौशालाओं का संचालन नहीं कर पा रही हैं. ऐसे में गौशालाओं को एनजीओ के हवाले करने का निर्णय लिया गया.

इसलिए गौशाला चलाने से विचलित हो रहे एनजीओ

फिलहाल 627 गौशालाओं को एनजीओ के सुपुर्द कर दिया है. इन्हें प्रति गाय 20 रुपए प्रतिदिन के लिहाज से अनुदान की दरकार है. उन्होंने बताया कि बोर्ड ने सरकार से प्रदेश के तीन लाख गौवंश के लिए 300 करोड़ के बजट की मांग की थी. इसमें सरकार ने 211 करोड़ मंजूर किए. 190 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई लेकिन अब तक सिर्फ 90 करोड़ की राशि ही मिल पाई है. जिसे तमाम एनजीओ को और गौशालाओं को बतौर तीन महीने की किस्त अनुदान दे दिया गया है. लेकिन अब भी बचे हुए पैसों की लंबे समय से दरकार चल रही है क्योंकि गौशाला संचालित करने वाले एनजीओ अब विचलित हो रहे हैं. मध्यप्रदेश में फिलहाल 1760 गौशाला अस्तित्व में आ चुकी हैं, इनमें से 627 गौशाला एनजीओ के हवाले हैं.

Tags: Jabalpur news, Madhya pradesh latest news, Madhya pradesh news, Madhya Pradesh News Updates, MP politics

.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published.