बेटी को विदा करते इतना रो क्यों रहा था यूक्रेन का वो पिता, वजह जान आपकी भी आंखें नम हो जाएंगी


‘जंग तो चंद रोज होती है
जिंदगी बरसों तलक रोती है’

‘बॉर्डर’ फिल्म का यह गीत जंग की विभीषिका को समझाने के लिए काफी है। लड़ाई धरती के किसी भी कोने में लड़ी जा रही हो, आखिर में नुकसान मानवता का होता है। किसी बच्चे के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए छिन जाता है, पत्नी विधवा हो जाती है, गांव के गांव में सन्नाटा छा जाता है। मातम की चीख बरसों तक सुनी जाती है। यूक्रेन से आ रही तबाही की तस्वीरें देख दुनिया का हर समझदार इंसान दुखी है भले ही वह रूस का नागरिक ही क्यों न हो।


बेटी को चूमते हुए यूक्रेन के एक बदनसीब बाप की तस्वीर वायरल है। वजह जानकर आपकी भी आंखों से आंसू छलक पड़ेंगे। बार-बार बेटी को चूमता पिता यह सोचकर दुखी था कि शायद यह बेटी से उसकी आखिरी मुलाकात हो। किसी को पता नहीं कि फिर कभी वह अपनी गुड़िया से मिल पाएगा या नहीं। वह अपनी बेटी को आखिरी गुडबाय कह रहा था। वह बार-बार बेटी को चूमता है, दुलारता है, आंखों से आंसू छलकते हैं फिर खुद को संभालता है। जिसने भी यह तस्वीरें देखीं आंखें भर आईं। बम धमाकों के बीच वह अपनी बेटी को तो सुरक्षित स्थान पर भेज रहा होता है लेकिन वह खुद नहीं जा सकता। यह कैसी विडंबना है। यह कैसा वक्त है।

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दरअसल, यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद 18 से 60 साल के पुरुषों के देश छोड़ने पर पाबंदी लगा दी गई है। यूक्रेन बॉर्डर एजेंसी का कहना है कि यह कदम देश की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है। वायरल हो रहे बाप-बेटी के इस वीडियो को दुनियाभर के लाखों लोग देख चुके हैं। बेटी को गले लगाने और चूमने के बाद यूक्रेन का वह पिता अपनी गुड़िया को पत्नी के साथ देश से बाहर भेज देता है। उसकी जान तो खतरे में है लेकिन उसे यह तसल्ली होती है कि वह रहे न रहे, उसकी गुड़िया अपने सपनों को पूरा करेगी। खुशहाल जिंदगी जिएगी। इस विदाई के पल को किसी ने रिकॉर्ड कर लिया और अब लाखों-करोड़ों आखें नम हैं।

‘बॉर्डर’ फिल्म की आगे की लाइनें हैं…

‘सन्नाटे की गहरी छांव, खामोशी से जलते गांव
ये नदियों पर टूटे हुए पुल, धरती घायल और व्याकुल
ये खेत गमों से झुलसे हुए, ये खाली रस्ते सहमे हुए
ये मातम करता सारा समां, ये जलते घर, ये काला धुआं’

इतिहास गवाह है जंग जब भी हुई है, भारी तबाही आई है। यूक्रेन में रूस के जेट और टैंक बम बरसाने लगे तो महिलाएं और बच्चे देश छोड़कर भागने लगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक जंग छिड़ने के 24 घंटे के भीतर ही हजारों बच्चे अपनी मांओं के साथ यूक्रेन छोड़ चुके हैं। यूएन ने कहा है कि यूक्रेन में एक लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं।

रूसी मांग रहे माफी
यूक्रेन संकट पर एक और तस्वीर वायरल है। यह कुछ रूसी नागरिकों की तस्वीरें हैं। वे एक कार्ड लेकर दूसरे शख्स को गले लगाए दिख रहे हैं। कार्ड में लिखा, ‘मैं एक रूसी नागरिक हूं, मैं उसके लिए (यूक्रेन पर हमले) माफी चाहता हूं।’ कोई एक देश नहीं, रूस के भी शांतिप्रिय लोग हमले के खिलाफ ही होंगे। कोई भी अमनपसंद किसी की जान लेना नहीं चाहेगा। यूक्रेन से जो तस्वीरें आ रही हैं उनमें रिहायशी इलाकों में हुई तबाही भी साफ देखी जा रही है। माफी मांगने वाली तस्वीरें एक नहीं, कई हैं।

आखिर में ‘बॉर्डर’ फिल्म के गीत की लाइनें…

‘ये मरते बच्चे हाथों में, ये मांओं का रोना रातों में
मुर्दा बस्ती, मुर्दा है नगर, चेहरे पत्थर हैं दिल पत्थर’

किसी को नहीं पता कि यूक्रेन में बमबारी कब थमेगी लेकिन इस तरह की तस्वीरें सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या इस युद्ध को रोका नहीं जा सकता था? क्या युद्ध ही यूक्रेन-रूस विवाद का अंतिम विकल्प था?

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बेटी को गुडबाय कहते पिता की तस्वीर वायरल।

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