स्वच्छता का पंच लगा चुके इंदौर की आबोहवा भी होगी एकदम शुद्ध, इंटरनेशनल प्रोजेक्ट करेगा कमाल


इंदौर. देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर (Indore) एक और कीर्तिमान बनाने जा रहा है. साफ सफाई के बाद अब वो अपने शहर की आवोहवा भी शुद्ध करने जा रहा है. वायु प्रदूषण से निपटने के लिए उसे एक अंतर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है.

सफाई के बाद अब इंदौर सबसे शुद्ध आवोहवा वाला शहर भी बनने की तैयारी में है. वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट क्लीन एयर कैटालिस्ट के लिए उसे चुना गया है. पूरी दुनिया में सिर्फ दो ही शहरों को इसके लिए चुना गया है. दूसरा शहर इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता है.

इंदौर में क्लीन एयर कैटालिस्ट
सफाई में छक्का लगाने की तैयारी कर रहा इंदौर अब स्वच्छ आबोहवा वाला शहर बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है. प्रदूषण से निपटने के अंतर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट क्लीन एयर कैटालिस्ट यानि सीएसी के लिए दुनिया के दो चुनिंदा शहरों में इंदौर को शामिल किया गया है. दूसरा शहर इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता है. अंतर्राष्ट्रीय संस्था वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट के सहयोग से इन शहरों की आबोहवा को स्वच्छ करने का कार्यक्रम 2025 तक चलेगा. इसके अनुभव के आधार पर विकासशील देशों के शहरों में वायु प्रदूषण से निपटने की रणनीति तय की जाएगी.

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वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सबसे सुझाव मांगे
अभी दुनियाभर में वायु प्रदूषण के कारण हर साल 67 लाख लोगों की मौत होती है. इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य 2050 तक मौतों की संख्या में 50 फीसदी की कमी लाना है. इसके लिए इंदौर से पहल की गई है. वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट के हैड डॉ. अजय सिंह नागपुरे का कहना है, इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है. लेकिन ये शहर दिल्ली जैसे प्रदूषण की गिरफ्त में न चला जाए इसलिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है. अलग अलग पेशे से जुड़े लोगों से राउंड टेबिल चर्चा की जा रही है. पहले चरण में इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से बातचीत कर उनके सुझाव लिए गए हैं. उन्होंने जो सुझाव दिए उससे इंदौर की हवा शुद्ध करने में बहुत अधिक मदद मिलेगी.

सबका साथ-सबका विकास
डॉ. अजय सिंह नागपुरे ने बताया कि दूसरे चरण में मीडिया, आम जनता, आईआईटी-आईआईएम और दूसरी शैक्षणिक और सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर जागरूकता फैलाने के लिए काम किया जाएगा. इसमें सरकार और स्थानीय प्रशासन का सहयोग भी लिया जा रहा है. उन्होंने कहा -इस पायलट प्रोजेक्ट से पूरी दुनिया को दिखाएंगे कि कैसे जनता के साथ मिलकर छोटी-छोटी तकनीक विकसित कर वायु प्रदूषण कम किया जा सकता है. दुनिया में अभी एड्स, टीबी से भी ज्यादा मौतें वायु प्रदूषण से होती हैं. 5 साल के इस प्रोजेक्ट से जो रणनीति तैयार होगी वो पूरी दुनिया, खासकर विकासशील देशों के शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने और लाखों अकाल मौत रोकने में कारगर सिद्ध होगी.

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