रूस-यूक्रेन को जंग की भट्ठी में झोंक हाथ सेंक रहा अमेरिका, गैस का दाम चार गुना बढ़ाया तो यूरोप के उड़े होश


नई दिल्ली: यूरोपीय संघ ने अमेरिका (US) पर यूक्रेन युद्ध (Russia vs Ukraine War) से मुनाफ़ा कमाने का आरोप लगाया है। अमेरिका (US) पर आरोप है कि उसने रूस-यूक्रेन को जंग (Russia vs Ukraine War) के लिए भड़काया और महंगी कीमतों पर बंदूकें और गैस बेची। अमेरिका (US) ने गैस के रेट चार गुना तक बढ़ा दिए। कई वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि सैनिकों द्वारा पहली बार आक्रमण किए जाने के नौ महीने बाद, अमेरिका लड़ाई जारी रखने से सबसे अधिक लाभ उठाने के लिए खड़ा था। अगर ध्यान से देखा जाए तो रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia vs Ukraine War) से सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाला देश यूएस ही है। इसकी वजह है कि अमेरिका हथियार और गैस काफी ऊंची कीमतों पर बेच रहा है। यूरोपीय संघ (EU) ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि अमेरिका सहयोगी होने के बाद भी उसकी मजबूरी का फायदा उठा रहा है। ईयू के एक अधिकारी ने कहा कि इस बात पर गंभीरता से सोचना होगा कि क्या वाकई अमेरिका यूरोपीय संघ का सहयोगी है। क्योंकि, पिछले नौ महीनों में ईयू से यूक्रेन के लिए हथियार और पैसे मांगने के अलावा अमेरिका ने किसी भी दूसरे मसले पर बात नहीं की है। हाल के महीनों में, यूरोपीय लोगों ने रूसी ऊर्जा और गैस को बंद कर दिया है और देशों को अपने तेल के लिए अमेरिका की ओर देखने के लिए मजबूर होना पड़ा है। यूरोपीय संघ के देश हालांकि गैस के लिए लगभग चार गुना ज्यादा भुगतान करते हैं।

यूरोप की कंपनियां अपना बिजनस अमेरिका में कर रहीं शिफ्ट
यूरोपीय संघ के अधिकारियों के मुताबिक, पूरी दुनिया जहां रूस-यूक्रेन युद्ध से परेशान है। वहीं अमेरिका ऐसा अकेला देश है जिसे इस युद्ध से फायदा हो रहा है। इसकी वजह है अमेरिका यूरोप को ऊंची कीमतों पर गैस बेच रहा है। इतना ही नहीं आरोप है कि अमेरिका यूरोप को अपने हथियार खरीदने के लिए भी मजबूर कर रहा है। सस्ते ईंधन और सब्सिडी के लालच में यूरोप की तमाम कंपनियां अपना व्यवसाय अमेरिका स्थानांतरित कर रही हैं। आईआरए के तहत हरित उत्पाद खरीदने पर टैक्स क्रेडिट का बंदोबस्त किया गया है। इसी वजह से तमाम कंपनियां अमेरिका का रुख कर रही हैं।

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यूरोपीय देशों में हथियारों की कमी
यूरोपीय देशों को हथियारों की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। वजह है कि हथियारों की भारी मात्रा में खेप यूक्रेन भेजी गई है। अमेरिका बड़ी संख्या में हथियारों को बेच रहा है। यूक्रेन को अमेरिका को आपूर्ति करने की लागत अब $19 बिलियन से अधिक है। आईआरए व्यवसायों और व्यक्तियों के लिए कर क्रेडिट प्रदान करता है जो पवन टर्बाइनों और वैकल्पिक वाहनों के उत्पाद खरीदते हैं। ये क्रेडिट ज्यादातर संयुक्त राज्य अमेरिका में बने प्रोडक्ट के लिए उपलब्ध हैं। बीते शुक्रवार को ईयू के व्यापार मंत्रियों की हुई बैठक में सर्वसम्मति से अमेरिका के आईआरए एक्ट को दुश्मनीभरा घोषित किया गया। अमेरिका से मांग की गई कि इस कानून के तहत 400 अरब डॉलर की सब्सिडी के प्रावधानों को इस तरह से बदला जाए कि जिससे यूरोपीय संघ के देश प्रभावित न हों। इधर अमेरिका का कहना है कि यह कानून उसकी घरेलु अर्थव्यवस्था से जुड़ा है, इसका यूरोप से कोई सीध संबंध नहीं।

इस वजह से बढ़ी गैस की कीमतें
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, बाली में G20 शिखर सम्मेलन में, यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने कथित तौर पर बिडेन से उच्च गैस की कीमतों के बारे में पूछा। उनके मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति इस मुद्दे से अनभिज्ञ लग रहे थे। बिडेन की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के एक प्रवक्ता के मुताबिक, यूरोप में गैस की कीमतों में बढ़ोतरी यूक्रेन पर पुतिन के आक्रमण की वजह से हुई है। बिडेन की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के एक प्रवक्ता के मुताबिक, यूरोपीय लोगों की जेब को प्रभावित करने वाली उच्च गैस की कीमतों के लिए अमेरिकी सरकार पर नहीं, बल्कि निजी बाजार के फैसलों पर दोष दिया जाना चाहिए। इधर एक प्रमुख रासायनिक बहुराष्ट्रीय निगम सोल्वे ने कहा है कि वह इस सप्ताह नए निवेशों के लिए यूएस का रुख करेगी। इस घोषणा ने कई लोगों को चौंका दिया है।

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अमेरिका अपनी ज्यादातर गैस यूरोपिय देशों को भेज रहा
जून में प्रकाशित ब्लूमबर्ग के एक लेख के मुताबिक, ऐसा पहली बार है जब अमेरिका अपनी अधिकांश गैस यूरोपीय देशों को भेज रहा है। अधिकारियों ने उस समय कहा था कि साल के पहले चार महीनों में अमेरिका से लगभग तीन-चौथाई लिक्विड गैस यूरोप भेजी गई थी। उन्होंने यह भी कहा था कि महाद्वीप में शिपमेंट पिछले साल इसी समय से तीन गुना हो गया था। बिडेन प्रशासन ने इस साल की शुरुआत में अधिक गैस भेजने की योजना बनाई थी, क्योंकि यूरोपीय देश रूसी तेल पर निर्भरता से दूर हो रहे थे।

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