Gujarat: लेडी डॉन के बेटे इस बार गुजरात में दौड़ा रहे हैं ‘साइकिल’, जानिए कितनी मुश्किल है डगर


अहमदाबाद: गुजरात की लेडी डॉन कही जाने वाली संतोकबेन जडेजा के बेटे कांधल जडेजा एक बार फिर पोरबंदर की कुटियाना सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। 2012 और 2017 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के टिकट पर इसी सीट से चुनाव जीत चुके जडेजा ने इस बार समाजवादी पार्टी का दामन थामा है। इस बार कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन में यह सीट एनसीपी को नहीं बल्कि कांग्रेस को मिली, जिसके बाद कांधल ने एनसीपी से इस्तीफा दे दिया। वह गुजरात में एनसीपी के इकलौते विधायक थे।

पिछला विधानसभा चुनाव एनसीपी अलग लड़ी थी और कांधल जडेजा ने बड़े अंतर से बीजेपी को शिकस्त दी थी। इन दिनों उनका एक बयान खासा सुर्खियां बटोर रहा है कि जीतने के लिए मेरा नाम ही काफी है। जडेजा कहते हैं कि 2012 में वह एनसीपी को गुजरात में लेकर आए और इस बार साइकिल की सवारी कर रहे हैं। वह कहते हैं, ‘मेरे मतदाता मेरा परिवार हैं, और वे पार्टी नहीं बल्कि मुझे वोट देते हैं। मुझे मेरे नाम और काम पर वोट मिलता है।’

मां संतोकबेन भी रह चुकी है विधायक
कांधल कहते हैं कि उनकी मां संतोकबेन भी इसी सीट से विधायक रही हैं और पूरा परिवार गरीबों की सेवा करता है। इस बार गुजरात में कांग्रेस- बीजेपी के अलावा आम आदमी पार्टी भी मैदान में है। गुजरात में चर्चा है कि क्या कांधल जडेजा इस ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में अपना राजनीतिक प्रभुत्व बरकरार रख पाएंगे? जानकारों का मानना है कि बेशक कांधल का अपना वोट बेस है, उनकी अपनी महेर जाति के 1.31 लाख वोट हैं, लेकिन इस बार कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा।

जडेजा को भाई कहकर बुलाते हैं लोग
गुजरात में आम लोगों के बीच जडेजा को ‘भाई’ कहकर भी बुलाया जाता है। जडेजा की मां संतोकबेन के जीवन पर एक फिल्म ‘गॉडमदर’ बन चुकी है। संतोकबेन पर पांच सौ से ज्यादा आपराधिक मामले भी दर्ज थे। संतोक बेन जडेजा 1990 के विधानसभा चुनाव में जनता दल के टिकट पर कुटियाना सीट से ही जीतकर विधानसभा पहुंची थीं। इसके बाद 2012 में उनके बेटे कांधल ने इसी सीट पर जीत हासिल की। कांधल जडेजा भी कई आपराधिक मामलों में आरोपी रहे हैं लेकिन उनका दावा है कि ये मामले अतीत से जुड़े हैं और लोग उन्हें उनकी पहुंच और काम के कारण वोट देते हैं।

वोटरों से कर रहे यह अपील
कांधल पिछली दो बार से बेशक एनसीपी के टिकट पर चुनाव जीत रहे थे, लेकिन वह अपने फैसले खुद लेते थे। उन्होंने कई मौकों पर पार्टी के आदेशों को दरकिनार करते हुए अपना फैसला लिया था। जुलाई 2022 में राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को वोट दिया था। अब जडेजा ने लोगों से उन्हें फिर से ज‍िताने की अपील करते हुए कहा है कि बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांगती है, लेकिन क्या आप अपने गांव के मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री को फोन करेंगे?

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