Nawab Malik: नवाब मलिक ने दी थी MVA बनाने की सलाह! जानिए महाविकास अघाड़ी बनने की कहानी


मुंबई: महाराष्ट्र(Maharashtra) की सियासत में फिलहाल महाविकास अघाड़ी सरकार(Mahavikas Aghadi Government) और महाराष्ट्र बीजेपी(BJP) के बीच में ठनी हुई है। इसकी शुरुआत साल 2019 के विधानसभा चुनावों से हुई थी। जब बीजेपी ने सबसे ज्यादा 105 सीटों पर कब्जा किया था। वहीं उसकी सहयोगी रही शिवसेना को चुनाव में 56 सीटों से संतोष करना पड़ा था। तब इस बात की संभावना जताई जा रही थी कि बीजेपी और शिवसेना(Shivsena) मिलकर देवेंद्र फडणवीस(Devendra Fadnavis) के नेतृत्व में दोबारा सरकार बनाएंगे।जबकि उप मुख्यमंत्री का पद शिवसेना को दिया जायेगा। हालांकि बाद में उद्धव ठाकरे ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि चुनाव के पहले तब के बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंद दरवाजे के भीतर हुई मीटिंग में यह भरोसा दिया था कि इस बार शिवसेना को मुख्यमंत्री पद दिया जाएगा। भले ही चुनाव में उनकी सीटें कितनी भी आएं। इस बात पर देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि इस तरह का कोई भी प्रस्ताव या भरोसा शिवसेना को नहीं दिया गया था। इस बीच शिवसेना और बीजेपी के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर माथापच्ची शुरू थी। तब एनसीपी नेता नवाब मलिक ने महाविकास अघाड़ी बनाने का फार्मूला दिया था। जिसमें शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस तीनों ही दल शामिल हो।

पवार को नवाब का प्रस्ताव पसंद आया
नवाब मलिक का प्रस्ताव शरद पवार को काफी पसंद आया और उन्होंने अपनी सहमति दे दी। दरअसल तब पवार केंद्र सरकार और बीजेपी से खासे नाराज चल रहे थे। क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें 25 हजार करोड़ रुपए के महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में नोटिस भेजा था। जिसे बाद में हटा लिया गया था। दरअसल पवार ने ईडी ऑफिस खुद जाने की घोषणा की थी।

उद्धव ठाकरे के सामने पहुंचा मलिक वाला प्रस्ताव
इसके बाद नवाब मलिक के प्रस्ताव को उद्धव ठाकरे और कांग्रेस नेताओं के सामने रखा गया। क्योंकि तीनों ही दल बीजेपी को सत्ता से बेदखल करना चाहते थे। इसलिए तीनों दलों ने मिलकर उद्धव ठाकरे की अगुवाई में महाविकास अघाड़ी सरकार बनाने का फैसला किया। हालांकि महाविकास अघाड़ी सरकार के गठन के बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की तरफ से यह बयान दिए जाते रहे कि यह सरकार खुद अपनी गलतियों की वजह से गिर जाएगी। दूसरी तरफ महाविकास अघाड़ी सरकार और गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी के बीच में भी कई मुद्दों पर टकराव चल रहा था। जिसमें ठाकरे मंत्रिमंडल द्वारा भेजे गए 12 विधान परिषद सदस्यों के नामों पर मंजूरी ना दिया जाना भी एक अहम मुद्दा था। इन्हीं सबके बीच प्रवर्तन निदेशालय ने महाविकास अघाड़ी सरकार के एक दर्जन से ज्यादा नेताओं और कुछ मंत्रियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी।

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