Russia Ukraine War: यूक्रेन के रेलवे स्टेशन पर आर्मी, एयरपोर्ट पर फाइटर प्लेन देखकर डर गई थी, लखनऊ लौटी रक्षा ने बयां की आपबीती


लखनऊ: रूस ने यूक्रेन में हमला (russia ukraine war) कर दिया है। युद्ध का भयानक अनजाम सोचकर एक बार फिर दो देश ही नहीं पूरी दुनिया दहल गई है। दुनिया पर आर्थिक संटक भी गहराने लगा है, शेयर मार्केट गिर रहे हैं। यूक्रेन से लोग भागकर सुरक्षित ठीकानों पर जाना चाह रहे हैं। हमले में अपनों को खोने के बाद खून से लथपथ लोगों की भयानक तस्वीरे भी सामने आ रही है। पूरी दुनिया की डिप्लोमेसी रूस-यूक्रेन के इर्द गिर्द चल रहा है। कुछ ऐसा ही हाल भारत का भी है, जो यूक्रेन में फंसे भारतीयों को बचाकर निकालने के प्रयास में जुटा है। युद्ध का एक बुरा परिणाम यूक्रेन में पढ़ने गए भारतीय स्टूडेंट (indian student in ukraine) भुगत रहे हैं। सोचिए जब इंटरनेशल एयरपोर्ट पर आते ही फाइटर प्लेन नजर आने लगे और चारों तरफ आर्मी हो तो किसी स्टूडेंट के मन पर क्या बीतेगी। यही हाल था यूक्रेन से उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर लौटी रक्षा सचान का।

यूक्रेन से सुरक्षित निकलकर अपने घर लखनऊ लौटी रक्षा सचान ने टीम एनबीटी से अपने अनुभव साझा किए। रक्षा सचान यूक्रेन के लविव शहर में स्थित डेनिलो हैलिट्स्की लविव नेशनल मेडिकल यूर्निवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। जो कि सेकेंड ईयर की स्टूडेंट है। रक्षा अपने परिवार के साथ लखनऊ में रहती है। पिता अनिल कुमार सचान फार्मासिस्ट हैं। बातचीत में रक्षा ने बताया कि उसने दिसंबर 2020 में यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया था। बीच में घर भी आई। पिछले साल सितंबर 2021 में वापस अपनी यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में पहुंच गई। कोरोना की वजह से उनकी क्लास ऑनलाइन ही चल रही थी। रक्षा ने बताया कि एक महीने पहले तक युद्ध जैसा कोई भी माहौल हमें वहां नहीं दिखा। सब कुछ सामान्य था। लेकिन अचानक सब बदल गया, यहां तक की उसने वापस लौटते हुए, एयरपोर्ट पर फाइटर प्लेन, रेलवे स्टेशन पर आ्र्मी और युद्ध का माहौल देखा। रक्षा ने कहा कि तब मुझे डर का एहसास हुआ।

यूक्रेन में रक्षा

एक हफ्ते पहले मिला, यूक्रेन छोड़ने का नोटिस
रक्षा ने बताया कि करीब एक महीने पहले इंडियन एम्बेसी से फोन आया कि आप सभी स्टूडेंट खराब स्थिति के लिए तैयार रहें। फिर करीब एक हफ्ते पहले उन्हें यूक्रेन छोड़ने के लिए नोटिस मिला। उन्हें लगातार नोटिस और हेल्पलाइन नंबर की डिटेल भेजी जाने लगी। इसके बाद रक्षा ने परिवार से बात की और यूक्रेन से निकलने का फैसला किया। 22 फरवरी को पहले वह लविव से ट्रेन के जरिए कीव पहुंची। जहां पहली बार उसने रेलवे स्टेशन पर लगभग हर जगह सेना के जवानों को देखा। इसके बाद वह कीव इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची, जहां रनवे पर फाइटर प्लेन भी तैयार खड़े थे। रक्षा ने बताया कि लविव में ऐसा नजारा तब तक नहीं दिखा था, इसलिए पहली बार उसे डर का एहसास हुआ। लगा कि युद्ध कभी भी शुरू हो सकता है। आखिरकार वह दुबई होते हुए 23 फरवरी को सुरक्षित लखनऊ में अपने परिवार तक पहुंच गई।
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दोस्तों से लगातार हो रही बात
रक्षा ने बताया कि जिस हॉस्टल में वह रह रही थी, वहां भारत के ही उसके कई दोस्त अब भी फंसे हुए हैं। उनकी आज की फ्लाइट थी, लेकिन अब सब कैंसिल हो गई है। अब सभी डरे हुए हैं। रक्षा उनसे लगातार हालचाल पूछ रही है। उसने कहा कि उम्मीद है जल्द ही सरकार उन तक मदद पहुंचाएगी। रक्षा ने बताया कि स्टूडेंट्स को सुरक्षित रखने के लिए कीव में रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट के पास सेल्टर होम भी बनाए हैं।

रक्षा के परिवार ने खुद खर्च किए 50 हजार रूपये
रक्षा के पिता अनिल कुमार सचान ने बताया कि भारत सरकार एयर इंडिया की फ्लाइट से लोगों को वहां से निकाल रही है। लेकिन उन्होंने पहले ही बेटी के लिए दुबई के रास्ते फ्लाइट का टिकट बुक कर दिया। इसके लिए उन्हें लगभग 50 हजार रूपये खर्च करने पड़े। फ्लाई दुबई फ्लाइट से रक्षा कीव से दुबई पहुंची। फिर वहां से 23 फरवरी की सुबह लखनऊ पहुंची।

raksha in ukraine with her friends

यूक्रेन में दोस्तों की साथ भारतीय छात्रा रक्षा

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