Russia Ukraine War News : रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध क्यों हो रहा है? जानिए इतिहास की पूरी कहानी


रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine War) अब तीसरे विश्व युद्ध (Third World War) की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इनके बीच इस बार विवाद की जड़ NATO को माना जा रहा है। NATO यानी North Atlantic Treaty Organization, जिसे साल 1949 में शुरू किया गया था। यूक्रेन NATO में शामिल होना चाहता है लेकिन रूस ऐसा नहीं चाहता।

रूस के खिलाफ अमेरिका समेत नाटो के सभी सदस्य देश पूरी ताकत के साथ खड़े हैं। वहीं, रूस का समर्थन करने वाले देशों की भी कोई कमी नहीं है। यूक्रेन के समर्थन में अमेरिका, ब्रिटेन, जापान समेत कई देशों ने तो कठोर प्रतिबंधों की झड़ी लगा दी है। जर्मनी ने तो रूस की गैस पाइपलाइन नॉर्ड स्ट्रीम-2 पर ही रोक का ऐलान कर दिया है।

इसके बावजूद पुतिन न तो झुकने को तैयार हैं और न ही अपने फैसले से पीछे हटने को। इसके इतर रूस ने तो यूक्रेन के दो इलाकों को स्वतंत्र देश की मान्यता तक दे दी है। खुद व्लादिमीर पुतिन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यूक्रेन पर रूसी भाषी लोगों के नरसंहार करने का आरोप लगाया है।

उन्होंने यह भी मांग की है कि यूक्रेन को खुद को सैन्यीकरण करने से रोकना चाहिए। ऐसे में सवाल उठता है कि यूक्रेन की पूरी कहानी क्या है और व्लादिमीर पुतिन इस छोटे से देश को कुचलना क्यों चाहते हैं। सोवियत संघ के विघटित होने के बाद रूस और यूक्रेन के संबंध काफी अच्छे थे। यूक्रेन की विदेश नीति पर रूस का गहरा प्रभाव था।

यूक्रेन की सरकार भी रूसी शासन के आदेश पर ही काम करती थी। लेकिन, बिगड़ती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और अल्पसंख्यक रूसी भाषी लोगों के बहुसंख्यक यूक्रेनी लोगों पर शासन ने विद्रोह की चिंगारी सुलगा दी।

साल 2014 में यूक्रेनी लोगों के विद्रोह ने संसद को अपने रूसी समर्थक राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को हटाने के लिए बाध्य कर दिया। उसी साल यूक्रेनी लोगों ने अमेरिका और यूरोप समर्थक नेता पेट्रो पोरोशेंको को राष्ट्रपति चुन लिया। तब से विक्टर यानुकोविच रूस में निर्वासन काट रहे हैं।

साल 2019 में यूक्रेन ने संविधान में संशोधन कर खुद को यूरोपीय संघ और नाटो सैन्य संगठन का हिस्सा बनने का ऐलान कर दिया। बस यही बात रूस को नागवार गुजरी और उसे लगने लगा कि यूक्रेन उनके लिए भविष्य में खतरा बन सकता है।

यूक्रेन रूस और पश्चिमी देशों के बीच बफर जोन का काम करता है। इसके बावजूद यूक्रेन ने 1990 के समझौते को तोड़कर नाटो का सदस्य बनने का फैसला किया। यूक्रेन को लगता है कि वह यूरोपीय संघ और नाटो का हिस्सा बनकर अपने देश की अर्थव्यवस्था को सुधार सकता है।

वहीं, रूस को डर है कि अगर यूक्रेन नाटो का सदस्य बन गया तो दुश्मन देशों की पहुंच उसकी सीमा तक हो जाएगी। दूसरी दलील यह है कि पूर्वी यूक्रेन कोयले और लोहे से समृद्ध इलाका है। यहां की भूमि भी काफी उपजाऊ है। पुतिन की नजर पूर्वी यूक्रेन के खदानों पर भी है।

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