गुजरात में कोयला घोटाले को लेकर कांग्रेसी नेता का सवाल चौकीदार ही “भागीदार” है?



गुजरात के लघु एवं मध्यम उद्योगों को जारी होने वाले कोल इंडिया की तरफ से सब्सिडी वाले कोयले का बड़ा हिस्सा घोटाले की भेंट चढ़ गया है। आरोप के मुताबिक मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में इसे खपाया जा रहा है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात के लघु एवं मध्यम उद्योगों को कोल इंडिया से जारी होने वाले सब्सिडी वाले कोयले का बड़ा भाग मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को बेचा जा रहा है। इसको लेकर विपक्षी दल भाजपा पर हमलावर है। यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने अपने एक ट्वीट में सवाल किया कि क्या चौकीदार ही भागीदार है?

बता दें कि उन्होंने अपने ट्वीट में एक अखबार की कटिंग को शेयर करते हुए सवाल किया, “चौकीदार ही ‘भागीदार’ है?” आरोप के मुताबिक हर साल करीब 3 सौ करोड़ का कोयला टैक्स चोरी कर इंदौर ,बड़वाह, भोपाल व नागपुर में बेचा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक यह काम 2008 से चल रहा है। इस धंधे में लगे माफिया को 30 टन के एक ट्रक में डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा की अवैध कमाई है।

बता दें कि गुजरात को 2017-18 तक सालाना 2.16 लाख टन कोयला जारी होता था लेकिन अब मात्रा बढ़ गई है। हालांकि सरकारी वेबसाइट पर अपडेट नहीं है। दरअसल इस घोटाले के आरोप में कहा गया है कि राज्य की स्मॉल और मीडियम लेवल इंडस्ट्रीज को कई एजेंसियों ने पिछले 14 साल में कोयला देने की जगह दूसरे राज्य के उद्योगों को अधिक दामों पर बेचा। इसमें 5 हजार से 6 हजार करोड़ रुपए का घोटाला किया गया है।

सब्सिडी वाले कोयले की अच्छी खपत ईंट उद्योंगों में देखी जा रही है। बता दें कि इंदौर से सटे बड़वाह, खंडवा, बुरहानपुर के ईट भट्‌ठे पर इस कोयले को खरीदा जा रहा है। इंदौर के एक कोयला व्यापारी ने माना कि सब्सिडी का कुछ कोयला ईंट भट्‌ठे वालों को बेचा जाता है। हालांकि शख्स ने खुद को इस धंधे में शामिल होने से मना किया है।

वहीं इस कालेबाजारी के खेल को लेकर जब केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय के सचिव अनिल जैन सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जिन एजेंसियों को नियुक्त करती है, उन्हें कोयला दिया जाता है। इसके बाद हमारी उसमें कोई भूमिका नहीं होती।

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