जन्मोत्सव विशेष :-

पत्रकार श्री राजेन्द्र शर्मा – व्यक्तित्व और कृतित्व

(डॉ. घनश्याम बटवाल, संपादक/लेखक)

समय के साथ लोग बदले , पत्रकार बदले , पत्रकारिता बदली , लोगों का विश्वास बदला परन्तु हर क्षेत्र में विश्वास बनाये रखने वाले नहीं बदले कठिनाइयों में, प्रतिकूल परिस्थितियों में , उतार चढ़ाव में उन्हें बदला नहीं जा सका।
ऐसे ही व्यक्ति नेतृत्व करते हैं , दिशा दर्शन प्रदान किया करते हैं । यह हर क्षेत्र में है । यही आशा और विश्वास की किरण भी है हम सबके लिये।

यहां बात पत्रकारिता की है । प्रसंग खुशनुमा है, हमारे अग्रज और व्यक्ति नहीं संस्था मानिंद पत्रकार – संपादक भाई साहब श्री राजेन्द्र शर्मा के जन्मोत्सव का।
अशेष – बहुविध अनंत शुभकामनाएं।

यूं तो अविभाजित मध्यप्रदेश की पत्रकारिता का इतिहास एक सौ बहोत्तर साल पुराना है । कालखंड में परिवर्तन होते रहे । पत्रकारिता गतिशीलता से चलती रही।
आज़ादी के पूर्व और आजादी के बाद की पत्रकारिता में भी अंतर आया है।
त्याग , तपस्या और बलिदान से मिली स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाये रखने और संवारने की जिम्मेदारी बाद की पीढ़ी पर आई है।

आज़ादी के पहले जन्मे श्री राजेन्द्र जी शर्मा ने बखूबी दायित्व निर्वहन किया है और आज भी पूर्ण चेतना से मार्गदर्शन कर रहे हैं।

प्रख्यात पत्रकार श्री पराड़कर जी ने कहा था, सच्चे भारतीय पत्रकार के लिये पत्रकारिता केवल कला या जीविकोपार्जन का साधन मात्र नहीं होनी चाहिए।
इसके लिये वह कर्तव्य – साधन की पुनीत वृति भी होनी चाहिए, क्योंकि अपने राष्ट्र में जनजागृति का आवश्यक और अनिवार्य कार्य करना भारतीय पत्रकार का उत्तरदायित्व है।

यह कथन सांगोपांग रूप से अक्षरशः खरा उतरता है श्री राजेन्द्र जी पर।

व्यक्ति से मुकाबला करना तो ठीक सरकारों से मुकाबला करना पड़ा, आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी पर उभर कर – निखर कर आये श्री राजेन्द्र शर्मा जी और अखबार स्वदेश भी।
मालवा के छोटे से कस्बे बड़नगर में आरम्भिक शिक्षा के बाद महाविद्यालय मंदसौर में ग्रेजुएशन आर्ट्स में किया।
जो बीजारोपण बड़नगर में हुआ उसका सिंचन मंदसौर में पूर्ण प्रखरता और भविष्य की संभावना के साथ हुआ।
सामान्य ब्राह्मण परिवार में जन्मे श्री राजेन्द्र जी चार भाई और चार बहनें हैं। पिता श्री रामचंद्र जी शर्मा मंदसौर में एक्ससाइज डिपार्टमेंट में रहे।
बड़े पुत्र श्री कैलाश चन्द्र शर्मा जिला एवं सत्र न्यायाधीश पद से निवृत्त हुए, दूसरे श्री राजेन्द्र जी जो राष्ट्रीय स्तर सम्मानित हुए। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सन 2013 में मानिकचंद्र वाजपेयी राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया।
तीसरे श्री सत्यनारायण शर्मा जो केंद्रीय जिला सहकारी बैंक प्रबंधक पद से निवृत्त हुए।
छोटे भ्राता जो लेखक के सहपाठी रहे श्री ओमप्रकाश शर्मा, आप जिला एवं सत्र न्यायाधीश रहे, बाद में जिला उपभोक्ता फोरम में नियुक्ति रही।
अब इंदौर में निवास करते हैं।
विशेषता यह रही की चारों भाइयों ने विधि की स्नातक डिग्री प्राप्त की। सभी अपने अपने क्षेत्रों में अग्रणी रहे।

मंदसौर से ग्वालियर और फिर भोपाल यह यात्रा जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुई। हर कदम पर प्रतिभा निखरती चली गई, सबको जोड़कर – सबसे जुड़कर जो संस्थागत रूप देख रहे हैं उसके पीछे हैं श्री राजेन्द्र शर्मा जी।

जीवन के पांच दशक वह भी पत्रकारिता जैसे पारदर्शी कार्यक्षेत्र में
निष्कलंक। सच, स्तुत्य है, प्रेरक है।
बात स्मरण आती है, जब योद्धा पत्रकार स्व. श्री गणेश शंकर विद्यार्थी ने कहा था, अखबारों के मशीनीकरण पर अखबार बड़े होंगे पर पत्रकार मशीन के पुर्जे, इसके बजाय छोटे से भी छोटे किंतु कुछ सिद्धांतों वाले होना कहीं अच्छा है।
यही ध्येय लेकर अपनी क़लम, अपनी  विचारधारा, अपनी बात के साथ अहर्निश भाव से जारी है यात्रा स्वदेश की, संपादक – पत्रकार श्री राजेन्द्र जी की।

नब्बे के उत्तरार्द्ध में मंदसौर से संघनिष्ठ लोगों ने मिलकर प्रिंट मीडिया में उतरने का निर्णय किया, संपादक मण्डल में स्वयं लेखक भी शामिल था। प्रथम अंक का विमोचन भी धूमधाम से युवराज क्लब सभागार में हुआ।
स्वदेश संपादक श्री राजेन्द्र शर्मा जी हाथों विमोचित अखबार के साथ संभावना भी जुड़ गई थी किंतु स्थानीय कारणों से “समाधान” की यात्रा लम्बी नहीं रही।

कई बार सुनने का सौभाग्य मिला।
धाराप्रवाह भी, अनुभव और ज्ञान का समावेश भी साथ स्पष्ट विचारों का तड़का भी। कहते हैं कॉलेज के जमाने मे भी आपको सुनने को स्टूडेंट्स रुक जाते थे।
मंदसौर के आज़ाद चौक, घंटाघर के सामने हुई सभा में क्रांतिकारी उद्बोधन ने तत्कालीन प्रशासन को सकते में ला दिया था।

कोविड के चलते सब कुछ रुका रुका सा है । इसके पहले 16 सितम्बर 2017 को पत्रकारिता के तीर्थ माधवराव सप्रे संग्रहालय एवं शोध संस्थान द्वारा प्रदेश के चयनित पत्रकारों को सामाजिक सरोकारों में श्रेष्ठ योगदान के लिये मध्यप्रदेश आंचलिक पत्रकारिता सम्मान दिये गए। ये पुरस्कार श्री राजेन्द्र शर्मा जी के हाथों प्रदान किये गए। पुरस्कृत पत्रकारों में लेखक भी शामिल था।
पद्मश्री श्री विजयदत्त श्रीधर, राज्य मंत्री श्री शिव चौबे, डॉ राकेश पाठक मंचासीन रहे।
लेखक द्वारा संपादित साहित्य संग्रह “उत्थान” का विमोचन श्री राजेन्द्र शर्मा जी ने किया। उनसे जब बताया गया कि मैं आपके गृहक्षेत्र मंदसौर से हूं तो प्रसन्न होकर स्नेहाशिर्वाद दिया।
समारोह समापन पर पत्रकारों के साथ अल्पाहार करते हुए मंदसौर, रतलाम, सागर, शिवपुरी, देवास, उज्जैन, रीवा, जबलपुर के प्रतिनिधियों से बहुत सारी बातें की और बातों ही बातों में बहुत कुछ जान लिया।
यह ख़ूबी हमने आंखों देखी, क्योंकि मध्यप्रदेश – छत्तीसगढ़ की भौगोलिक  – राजनीतिक स्थितियों के तो आप जानकार हैं ही, संकेतों से ही पुष्टि करली।

स्वदेश के कार्यकारी संपादक वरिष्ठ पत्रकार श्री शिवकुमार विवेक ने भाई साहब पर आलेख के संकेत दिये तो टाला नहीं जासकता। उनका सानिध्य और मार्गदर्शन हमें नईदुनिया, भास्कर, अमर उजाला में मिलता रहा है।

आलेख का मिला जुला स्वरूप बन पड़ा है। अपनी बात तो है ही साथ ही विभिन्न क्षेत्रों और भिन्न आयु वर्ग के श्रेष्ठ जन से बातचीत की, पीढ़ियों के अंतर के बाद भी श्री राजेन्द्र शर्मा जी के प्रति सम्मान भाव नजर आया।
भिन्न विचारधारा के गुणीजन ने मुक्त कंठ से भाई साहब की प्रशंसा की, जबकि वे प्रत्यक्ष में पचास साल से नहीं मिले। हो सकता है आलेख और जन्मोत्सव प्रसंग से मित्रों का संवाद हो। शुभकामनाएं ।

■ बात भी – विचार भी मंदसौर-नीमच-इंदौर के प्रतिनिधि हस्ताक्षरों से:–

● पूर्व गृह एवं जनसंपर्क मंत्री मध्यप्रदेश शासन श्री कैलाश चावला-

श्री चावला ने बातचीत में भाईसाहब का नाम लेते ही प्रसन्नता व्यक्त की।  उनके शतायु होने की कामना करते हुए बात आगे बढ़ाई।
कहा वे मंदसौर कॉलेज में हमारे सीनियर रहे। कॉलेज की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय थे, वक्ता अच्छे होने और विषयों का अध्ययन होने से वे विजय प्राप्त करते थे।
कालांतर में भोपाल में उनसे मिलना – जुलना होता रहा। मंदसौर से जुड़ाव होने के कारण बड़े भाई समान स्नेह मिलता रहा। बाद में जब वे राजमाता जी के आग्रह पर ग्वालियर चले गए, दैनिक स्वदेश के भोपाल संस्करण प्रकाशन पर भी संपर्क रहा।

श्री चावला कहते हैं व्यक्तिगत तौर पर श्री राजेन्द्र शर्मा बेहद शिष्ट और व्यवहारिक हैं। पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों से उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। विचारधारा के प्रति सदैव स्पष्ट रहे और उसपर क़ायम रहे।
भाजपा सरकार के दौरान मंत्री रहते हुए भी मिलना होता, चर्चा होती रही, हमेशा प्रभावित किया। सादगी और स्पष्टता विशेष गुण देखा है।

घटना विशेष का ज़िक्र करते हुए श्री चावला ने कहा कि जब वे स्वयं मुख्यमंत्री श्री सुंदरलाल पटवा सरकार मंत्रिमंडल सदस्य थे, तब श्री पटवा के गृहग्राम कुकड़ेश्वर में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का आगमन हुआ। श्री पटवा के स्वर्गीय पिता की समाधि पर भी प्रधानमंत्री गये थे।  उस समय प्रदेश का पूरा मंत्रिमंडल कुकड़ेश्वर में मौजूद था।
इस पर दैनिक स्वदेश में श्री राजेन्द्र शर्मा का संपादकीय
पटवाजी, यह ठीक नहीं हुआ प्रकाशित हुआ था। बात तो कोई तीन दशक पहले की है पर अच्छी तरह याद है। यह दर्शाता है कि श्री शर्मा निष्पक्ष, निर्भीक और जागरूक पत्रकार – संपादक हैं।
यह संपादकीय देश भर में चर्चित रहा, यह धारणा थी कि स्वदेश पार्टी का मुखपत्र है , संपादकीय ने मिथक तोड़ा और प्रमाणित किया कि अखबार पाठकों और जनता के प्रति जवाबदेह है । इस वाकये के साक्षी रहे, श्री शर्मा के प्रति सम्मान ओर बढ़ा।

आपने कहा कि श्री शर्मा व्यक्ति के तौर पर बेहद सम्माननीय हैं। वहीं
राष्ट्रहित की पत्रकारिता में देश का स्थापित नाम है । प्रतिकूलताओं और कठिनाइयों में भी स्वच्छ और ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता को जीवित रखा है। उनकी शिक्षा – दीक्षा मालवा के बड़नगर – मंदसौर में होने से और राष्ट्रीय क्षितिज पर स्थापित होने से गर्व महसूस होता है।

● यह कहा मन्दसौर विधायक रहे, संघ के मालवा क्षेत्र के स्तंभ, श्री राजेन्द्र शर्मा को सहयोग और प्रोत्साहित करने वाले स्व. श्री ओमप्रकाश पुरोहित के सुपुत्र डॉ. क्षितिज पुरोहित ने।


कहते हैं प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती वह अपनी राह खुद बना लेती है लेकिन उसे वक्त पर समझने, जानने और संवारने के लिए कोई हाथ बढा दे तो उस प्रतिभा को पर लग जाते हैं और वह मुक्त गगन पर विचरण करते हुए आसमां की ऊंचाई को छूने को बेताब रहती है। यह उदाहरण किसी व्यक्ति के संदर्भ में देना हो तो दैनिक स्वदेश ग्वालियर और भोपाल के प्रबंध संपादक श्री राजेन्द्र शर्मा के लिए दिया जा सकता है। मंदसौर जिनकी प्रारंभिक कर्मस्थली रही, जहां उन्होने अपना अध्ययन पूर्ण किया। बहुत कम लोग होते हैं जो बुलंदियों के स्पर्श के बाद भी अपने को मूल जड़ो से जोड़कर रखते हैं परन्तु राजेन्द्र जी शर्मा इस मामले में अपवाद है। मंदसौर शहर के किला रोड पर स्थित बनिया चौक में अत्यंत ही साधारण परिवार में निवास करने वाले राजेन्द्र जी ने अपनी लेखन प्रतिभा से बहुत प्रारंभ से ही ध्यान आकर्षित करना प्रारंभ कर दिया था। किला रोड पर ही रहने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तात्कालिक जिला कार्यवाह श्री ओमप्रकाश जी पुरोहित के संपर्क में राजेन्द्र जी आए और जल्दी ही उनके परिवार के एक सदस्य बन गये। श्रीमती शशिकला पुरोहित के रूप  में एक भाभीजी उनके पास थी जिनके स्नेह से वे हमेशा अभिभूत रहे। अत्यंत ही विनम्र,  सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के धनी राजेन्द्र जी संस्कारों की उस अमूल्य निधि को अपने में समेटे है जो उनको हर एक से अलग बनाती है। अपने मित्र पुरुषोत्तम मालवीय के साथ दैनंदिन की गतिविधियों में संघर्ष करते हुए अंतर्मन में प्रज्वलित पत्रकारिता की ज्योति किसी आभामंडल को प्रदीप्त करने को आतुर थी जो उन्हे संघ की योजना में रेवा प्रकाशन के माध्यम से चलने वाले दैनिक स्वदेश इंदौर के सम्पादक तक ले गई। इस दौरान वे राजमाता सिंधिया के सम्पर्क में आए और जल्दी ही उनकी कर्मस्थली ग्वालियर हो गयी। मंदसौर से उनका भावनात्मक रिश्ता है और जब भी कोई उन्हे दिल से मंदसौर बुलाए वो अपनी तमाम व्यस्तताओं मे से समय निकाल ही लेते हैं।
सुन्दर लाल जी पटवा की सरकार को आईना दिखाने में वे पीछे नहीं रहे समान विचारधारा के होते हुए भी। उनकी स्वदेश की सम्पादकीय बडी चर्चा में रही थी।
क्षेत्रीय भाषाई समाचार पत्र संघ (इलना) के अध्यक्ष रहे।
विश्व हिन्दू परिषद के प्रदेश के उपाध्यक्ष रहे।
अनुकरणीय व्यक्तित्व के धनी है।

मंदसौर से 90 के दशक में प्रारंभ हुए दैनिक समाधान के विमोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में मन्दसौर आये थे।
2005 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के प्रांत अधिवेशन में मंदसौर आना हुआ।
मंदसौर के उनके सहपाठी और मित्रों से अभी भी जीवंत सम्पर्क उनका है।

बातचीत में डॉ. क्षितिज कहते हैं कि श्री राजेन्द्र जी भाई साहब वैचारिक प्रतिबद्धता पर दृढ़तापूर्वक चलने का श्रेष्ठ उदाहरण हैं। कठिन दौर में भी संकल्प के साथ अपनी राह चले और स्थापित होकर मिसाल बने हैं।

डॉ. क्षितिज पुरोहित स्वयं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का प्रांतीय दायित्व संभाल चुके हैं और महाविद्यालय में व्याख्याता रहे हैं।
वे श्री राजेन्द्र जी से बहुत प्रभावित हैं, उन्होंने पत्रकारिता की पीढ़ी तैयार की है जो राष्ट्रीयता भाव के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय है।
सामाजिक, धार्मिक, सार्वजनिक, पत्रकारिता, राजनीति, शिक्षा, लेखन, टीवी, फिल्मों आदि में गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्हें श्री राजेन्द्र जी की सन्निधि मिली है।

आदरणीय भाई साहब श्री राजेन्द्र जी के अमृत महोत्सव जन्मोत्सव शुभ प्रसंग पर अनंत शुभकामनाएं।

● श्री सुनील बिरथरे
सीनियर डी एस पी ( रिटायर्ड )
सी एस पी पलासिया , इंदौर ( रीटा. )
मध्यप्रदेश पुलिस
हाल मुकाम – इंदौर

पुलिस अधिकारी पद से रिटायर हुए श्री सुनील बिरथरे से हुई बातचीत तो वे बहुत उत्साहित लगे, अपने स्व. पिता प्रो. ऐल. सी . बिरथरे के माध्यम से मिले श्री राजेन्द्र शर्मा से बताया।

वे कहते हैं उनके पिता प्रोफेसर बिरथरे आरम्भ से जब मन्दसौर में इंटर कॉलेज 1954 में तब से स्नातकोत्तर महाविद्यालय बना 1986 तक वाणिज्य व्याख्याता रहे।
ऐनसीसी व सांस्कृतिक, खेलकूद गतिविधियों के प्रभारी भी रहे। उस दौरान कई खिलाड़ी नेशनल खेले, ऐनसीसी में बेस्ट कैडेट बने, कॉलेज कैडेट धनसुखलाल भाचावत का चयन गणतंत्र दिवस परेड में हुआ और बेस्ट कैडेट चुने गए। जो बाद में मन्दसौर जिले के सीतामऊ से विधायक बने।

इसी प्रकार श्री राजेंद्र शर्मा सांस्कृतिक गतिविधियों में उभरे, पिताजी स्व. प्रो. बिरथरे ने प्रतिभा को आगे बढ़ाया, प्रोत्साहित किया, प्रतिभाशाली होने से डिबेट्स में कॉलेज को विजय दिलाई।
महाविद्यालय की पत्रिका कीर्ति का संपादन किया।
श्री सुनील कहते हैं हालांकि भाई साहब श्री राजेन्द्र शर्मा से आयु में दस वर्षों का अंतर है, पर पिताजी के कारण जानकारी मिलती रही।
पिताजी श्री राजेन्द्र जी के प्रतापगढ़ पुलिया स्थित निवास और उनके सामने स्थित श्री शिवनारायण कश्यप एडवोकेट के यहां जाते रहते थे।
छोटा शहर होने से सबसे सम्पर्क होता रहता था। आज जैसी आपाधापी नहीं होती थी।
उनके प्रति सम्मान भाव बनता गया बाद में जब हम कॉलेज में आये तब आप ग्वालियर चले गए थे।

पढ़ाई के बाद जब मध्यप्रदेश पुलिस सेवा में चयन हुआ और 1987 – 88 में प्रदेश के गुप्तचर शाखा के अधिकारियों की विशेष सेमिनार पुलिस मुख्यालय जहांगीराबाद भोपाल में हुई तब मुख्य वक्ता श्री राजेन्द्र शर्मा थे।
प्रेरणादायक व्याख्यान के बाद व्यक्ति परिचय कराया गया, जब नाम सुनील बिरथरे कहा तो प्रो. बिरथरे के बारे में पूछा तो उन्हें बताया कि उन्हीं का पुत्र हूं, बहुत प्रसन्न हुए, बीस साल पुरानी बात स्मरण कर पीठ थपथपाई और कहा कोई समस्या हो तो मिलना।
आईजी, डीआईजी भी चकित रह गए, उन्हें प्रो. बिरथरे के बारे में बताया। मुझे भी आश्चर्य हुआ इतने बड़े व्यक्ति अपने गुरू के प्रति कितना आदर भाव रखते हैं।

ऐसे ही सन 2001 – 02 में भोपाल डी एस पी, सी ऐस पी स्तर की प्रांतीय सेमिनार में मुख्य वक्ता श्री राजेन्द्र शर्मा जी थे।
संबोधन में विषय प्रतिपादन सटीक और बेहद प्रभावी था। नेशनल मीडिया कवरेज भी हुआ था।
सेमिनार के बाद सेल्यूट करने का अवसर मिला। पुनः कंधे पर हाथ रखा। ये बातें कभी भूल नहीं सकते ।

श्री बिरथरे कहते हैं, बचपन मे पिताजी से बाद में कॉलेज में जो सुना, पढ़ा उससे कहीं अधिक ही पाया भाई साहब को।
वे हर विषय पर तर्कसंगत और स्पष्ट बात कहते हैं। कहने की शैली और बॉडी लैंग्वेज प्रभावी है जो श्रोताओं पर गहरा असर करती है।
उनका गुरुजनों के प्रति सम्मान भाव हृदय आदर से भर देता है। यह उनके बड़प्पन का परिचायक है।
पत्रकारिता में राष्ट्रीय क्षितिज पर श्री राजेन्द्र शर्मा जी मंदसौर और मध्यप्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं यह हमारा सौभाग्य है।
बिरथरे परिवार आपके सुदीर्घ जीवन की कामना करता है।

चलते – चलते श्री राजेन्द्र शर्मा जी के बारे में बात हुई इसे श्री सुनील अपने को सौभाग्यशाली मानते हैं, बचपन में आदर्श रहे नायक के बारे में बताने का अवसर मिला।

सम्प्रति :-


डॉ. घनश्याम बटवाल
पत्रकार / लेखक / संपादक

One thought on “जन्मोत्सव विशेष :-

  • June 18, 2021 at 3:52 pm
    Permalink

    Bahut sunder rajendra bhai sb ko fir selogo ke dil me bithane ka karya aapke madhayam se hua logo ko unki yaad taaja kara di aapka aabhar avm dhanyavad.

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.