बिजली विभाग के कर्मचारियों के हड़ताल के कारण चंडीगढ़ में बाधित हुई पॉवर सप्लाई



बिजली कर्मचारी बिजली विभाग के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। विरोध कर रहे संगठनों का आरोप है कि प्रशासन ने उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद बिजली विभाग का निजीकरण किया है।

निजीकरण के विरोध में चल रहे बिजली कर्मचारियों के हड़ताल के कारण चंडीगढ़ के कई हिस्सों में पिछले 36 घंटे से भी अधिक समय से बिजली नहीं है। बिजली नहीं होने के कारण कई घरों में पानी तक नहीं है। यहां तक कि अस्पतालों को ऑपरेशन को भी टालना पड़ रहा है। इसके अलावा शहर की ट्रैफिक लाइट भी बिजली बाधित होने की वजह से काम नहीं कर पा रही है और ट्रैफिक व्यवस्था भी बिगड़ चुकी है।

बिजली की आपूर्ति नहीं होने की वजह से कई बच्चों की ऑनलाइन क्लासेज भी प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा कई संस्थानों में चल रहे परीक्षाओं पर भी असर पड़ा है। पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी में उपजे बिजली संकट को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है और केंद्र शासित प्रदेश के चीफ इंजीनियर को समन जारी किया है।

चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब और हरियाणा से बिजली व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए कर्मचारी की मांग की थी लेकिन दोनों राज्य ने इसमें असमर्थता जताई। वहीं प्रशासन ने इसके लिए आर्मी से भी मदद मांगी जिसके बाद आर्मी के इंजीनियरिंग विभाग के कर्मी चंडीगढ़ आए। इसी बीच पंजाब से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने ट्वीट कर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से चंडीगढ़ में उपजे बिजली संकट में हस्तक्षेप कर तुरंत हालात ठीक करवाने की मांग की है।

दरअसल बिजली कर्मचारी बिजली विभाग के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। बिजली विभाग के कर्मचारी बिजली का काम निजी कंपनी को देने के खिलाफ हैं। विरोध कर रहे संगठनों का आरोप है कि प्रशासन ने उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद बिजली विभाग का निजीकरण किया है। कर्मचारियों की आशंका है कि निजीकरण होने के बाद उनकी नौकरी भी प्रभावित होगी और बिजली की दरें भी मंहगी होगी।

इसी बीच मोबाइल ऑपरेटरों के संगठन सीओएआई ने बुधवार को कहा कि केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के कुछ हिस्सों में बिजली कटौती से दूरसंचार सेवाओं के बाधित होने के बाद ऑपरेटर वैकल्पिक साधनों का सहारा ले रहे हैं। संगठन ने बयान में कहा कि चंडीगढ़ शहर के कुछ हिस्सों में बिजली कटौती हुई है जिससे मोबाइल टावर काम नहीं कर पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी बाधित हो रही है। इसलिए बैटरी, जेनसेट, सौर पैनल जैसे वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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