केंद्र ने एससी में बताया- इतने हजार करोड़ नीरव मोदी, माल्या और चौकसी मामले में बैंको को मिले


सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी है कि ईडी द्वारा 4700 PMLA मामलों की जांच की जा रही है। नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और विजय माल्या के मामले में 18 हजार करोड़ रुपए बैंक को वापस मिल गए हैं।

नीरव मोदी, विजय माल्या और मेहुल चौकसी को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक अहम जानकारी दी है। केंद्र सरकार ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के मामले में 18 हजार करोड़ रुपए बैंक को वापस मिल गए हैं। कोर्ट में बताया गया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अब तक 67 हजार करोड रुपए के केस सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।

ईडी द्वारा 4700 मामलों की जांच की जा रही: तुषार मेहता ने कोर्ट में जानकारी दी कि ईडी द्वारा 4700 PMLA मामलों की जांच की जा रही है, जबकि पिछले 5 सालों से हर साल जांच के लिए मामलों की संख्या बढ़ रही है। पिछले 5 वर्षों में ऐसे अपराधों के लिए 33 लाख एफआईआर दर्ज हुई लेकिन PMLA के तहत केवल 2086 मामलों की जांच की गई। PMLA का बचाव करते हुए तुषार मेहता ने अन्य देशों का उदाहरण कर देते हुए बताया कि अन्य देशों की तुलना में हमारे यहां पीएमएलए के तहत जांच के लिए बहुत कम मामले उठाए जा रहे हैं।

बीजेपी सांसद ने साधा था निशाना: हाल ही में बीजेपी के सांसद वरुण गांधी ने विजय माल्या, नीरव मोदी को लेकर केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा था कि मजबूत सरकार से मजबूत कार्यवाही की अपेक्षा की जाती है। वरुण गांधी ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि, “विजय माल्या-9000 करोड़, नीरव मोदी-14000 करोड़, ऋषि अग्रवाल-23000 करोड़! आज जब कर्ज के बोझ तले दब कर देश में रोज लगभग 14 लोग आत्महत्या कर रहे हैं, तब ऐसे धन पशुओं का जीवन वैभव के चरम पर है। इस महा भ्रष्ट व्यवस्था पर एक ‘मजबूत सरकार’ से ‘मजबूत कार्यवाही’ की अपेक्षा की जाती है।”

बता दें कि विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी ने 22 हजार करोड़ से अधिक का चूना भारतीय बैंकों को लगाया था। लेकिन 18 हजार करोड़ के करीब रकम बैंकों को वापस मिल चुका है।

PMLA कानून को लेकर एससी में बहस: सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी समेत कई वरिष्ठ वकीलों द्वारा PMLA संशोधनों के संभावित दुरुपयोग से संबंधित पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट में दलीलें दी गई हैं। इसमें कड़ी जमानत की शर्तें, गिरफ्तारी के कारण की सूचना ना देना, बिना कॉपी दिए गिरफ्तारी, जांच के दौरान आरोपी द्वारा दिए गए बयान को सबूत मानने जैसी कई पहलुओं को लेकर कानून की आलोचना की गई है।

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