Pakistan Turkey News: तुर्की के साथ पांचवी पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान विकसित कर रहा पाकिस्तान, जानें कैसे भारत की बढ़ेगी टेंशन?


इस्लामाबाद: पाकिस्तान और तुर्की मिलकर पांचवीं पीढ़ी के एक लड़ाकू विमान (Pakistan Turkey Fighter Jet) को विकसित कर रहे हैं। यह विमान स्टील्थ तकनीक से लैस होगा। इसे दुश्मन देश के रडार आसानी से नहीं पकड़ पाएंगे। बड़ी बात यह है कि पाकिस्तान और तुर्की का यह लड़ाकू विमान (Pakistan Turkey Relations) अगले तीन साल में अपनी पहली उड़ान भर सकता है। पाकिस्तान पहले ही चीन के साथ मिलकर जेएफ-17 लड़ाकू विमान को बना चुका है। हालांकि, इस विमान के ज्यादातर पुर्जे विदेशी हैं, जिन्हें पाकिस्तान में असेंबल किया जाता है। हाल में ही चीन और पाकिस्तान ने जेएफ-17 के ब्लॉक-3 वेरिएंट को विकसित करने काा काम शुरू किया है।

टर्किश एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (टीएआई) के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) तेमेल कोटिल ने बताया कि तुर्की और पाकिस्तान पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान वाली इस परियोजना पर आपस में सहयोग कर रहे हैं। पाकिस्तानी अखबार बिजनेस रिकॉर्डर ने भी बताया है कि नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एनयूएसटी) में रिसर्च, इनोवेशन और कॉमर्शियल डिपार्टमेंट (एनयूएसटी) के प्रो-रेक्टर एयर वाइस-मार्शल डॉ रिजवान रियाज ने इस बात की पुष्टि की कि दोनों देश टीएफ-एक्स नाम का एक लड़ाकू विमान बना रहे हैं।

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पाकिस्तान ने पांचवी पीढ़ी के विमान बनाने की पुुष्टि की
रियाज ने कहा कि यह पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जिसके लिए पाकिस्तान और तुर्की अब सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एनयूएसटी ने पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉप्लेक्स और पाकिस्तान एयर फोर्स के सहयोग से पहले भी इस प्रकार की परियोजनाएं पूरी की हैं। हालांकि, उन्होंने लड़ाकू विमान और इसे विकसित करने को लेकर और जानकारी मुहैया नहीं कराई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दो इंजन वाला सभी मौसम में संचालन के योग्य स्टील्थ (नजरों से छुपकर रहने में सक्षम) लड़ाकू विमान ‘टीएफ-एक्स’ के आगामी तीन साल में पहली उड़ान भरने की संभावना है।

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2019 से पाकिस्तान के साथ काम कर रही तुर्की की यह कंपनी
पाकिस्तान में टीएआई ने देश के पहले प्रौद्योगिकी उद्यान ‘नेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी पार्क’ में 2019 में अपना पहला कार्यालय खोला था। पाकिस्तान और तुर्की ने कई रक्षा परियोजनाओं में मिलकर काम किया है, जिनमें हेलीकॉप्टर की खरीद और ड्रोन तकनीक का विकास शामिल है। दोनों देश दूसरे क्षेत्र में भी रक्षा सहयोग बढ़ाने पर नजदीकी से काम कर रहे हैं। चीन और पाकिस्तान ने मिसाइल निर्माण पर भी एक मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर साइन किया है। तुर्की के अधिकारियों ने कहा कि उनका देश पाकिस्‍तान को एक रणनीतिक सहयोगी के रूप में देखता है और उसके साथ मिलकर सिपेर लॉंग रेंज मिसाइल डिफेंस प्रॉजेक्‍ट पर काम कर रहा है।

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भारत के लिए कैसे खतरा बन सकता है यह विमान
भारत के पास वर्तमान में पांचवी पीढ़ी का कोई लड़ाकू विमान नहीं है। हालांकि, भारतीय कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ऐसे प्रॉजेक्ट पर पहले से ही काम कर रही है। लेकिन, एलसीए तेजस के डेवलपमेंटल हिस्ट्री को देखते हुए इस विमान के अगले 5 साल तक उड़ान भरने की संभावना बहुत ही कम है। अभी तक अमेरिका और चीन ही पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को ऑपरेट कर रहे हैं। ऐसे में अगर यह ताकत पाकिस्तान के पास आती है तो यह भारत के लिए चिंता की बात होगी। हालांकि, पाकिस्तान का यह विमान कितना ताकतवर है, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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