टीवी कार्टून से पीछा छुड़ाने के लिए माता-पिता ने बहन को सिखाया शह मात का खेल, फिर कैसे प्रागननंद बने ग्रैंडमास्‍टर


चेन्नई. भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर प्रागननंद ( r praggnanandhaa) दुनियाभर में छाए हुए हैं. 16 साल के प्रागननंद ने ऑनलाइन रैपिड शतरंज टूर्नामेंट एयरथिंग्स मास्टर्स (Airthings Masters) के 8वें दौर में उलटफेर करते हुए दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्‍नस कार्लसन (magnus carlsen) को हरा दिया. दुनिया के नंबर एक कार्लसन को हराने वाले प्रागननंद ने उस उम्र में खेल के गुर सीख लिए, जब उनकी उम्र के अधिकतर लड़कों को बच्चा कहा जाता है.

उन्‍होंने शह मात का खेल अपनी बहन के शौक से प्रभावित होकर सीखा था. 3 साल की उम्र में इस खेल को अपनाने वाले प्रागननंद की बड़ी बहन वैशाली को माता पिता ने इस वजह से शतरंज का खेल सिखाया गया, ताकि वह टीवी पर कार्टून देखने में अधिक समय बर्बाद न करें.

बेटी को लेकर चिंता में रहते थे माता- पिता 

बैंक में काम करने वाले प्रागननंद के पिता रमेशबाबू और मां नागलक्ष्मी इस बात को चिंता में रहते थे कि उनकी बेटी वैशाली टीवी देखने में काफी समय बिता रही है. वैशाली को उनके पसंदीदा कार्टून शो से दूर करने के लिए उन्‍होंने शतरंज से जोड़ा और फिर बहन को देखकर भाई की भी दिलचस्‍पी इस खेल में बढ़ गई. महिला ग्रैंडमास्टर 19 साल की वैशाली ने कहा कि शतरंज में उनकी रुचि एक टूर्नामेंट जीतने के बाद बढ़ी और इसके बाद उनका छोटा भाई भी इस खेल को पसंद करने लगा.

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उन्होंने कहा कि जब मैं 6 साल के आसपास की थी तो काफी कार्टून देखती थी. मेरे माता पिता चाहते थे कि मैं टेलीविजन से चिपकी नहीं रहूं और उन्होंने मेरा नाम शतरंज और ड्राइंग की क्लास में लिखा दिया. प्रागननंद ने 2018 में प्रतिष्ठित ग्रैंडमास्टर खिताब हासिल किया था. वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले भारत के सबसे कम उम्र और उस समय दुनिया में दूसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी थे.

Tags: Chess

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