सूरज की सतह पर क्या दिखा कि NASA को देनी पड़ी चेतावनी, बोला- अगले दो दिन पृथ्वी के लिए खास


हाइलाइट्स

  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने सूर्य के सतह की हलचल को देखकर जारी की चेतावनी
  • अगले दो दिनों में धरती से टकरा सकता है सूरज के निचली सतह से निकला प्लाज्मा
  • धरती के दक्षिणी हिस्से पर दिखेगा ज्यादा प्रभाव, रेडियो-जीपीएस के सिग्नल हो सकते हैं बाधित

वॉशिंगटन
सूरज की सतह से पैदा हुआ सौर तूफान तेजी से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। इस तूफान की स्पीड को देखकर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (नासा) के वैज्ञानिकों ने चेतावनी भी जारी की है। उन्होंने कहा कि सूरज से निकली सौर प्लाज्मा की ये विशाल तरंगें अंतरिक्ष में 10 लाख मील या 1600000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सफर कर रही हैं। इन कणों के अगले दो दिनों में पृथ्वी के वायुमंडल से टकराने की संभावना है। हालांकि, इसका ज्यादा प्रभाव पृथ्वी के दक्षिणी हिस्से में देखने को मिलेगा।

कोरोनल मास इजेक्शन का खतरा
नासा ने चेतावनी दी है कि पृथ्वी एक कोरोनल मास इजेक्शन (कोरोनल मास इजेक्शन) के संभावित प्रभावों को महसूस कर सकती है। यह इस हफ्ते के अंत में धरती से टकराने वाला है। द एक्सप्रेस के अनुसार, सूर्य के निचले हिस्से से निकली प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र का द्रव्यमान हमारे ग्रह की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ये तरंगे धरती से टकराने के बाद कई मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं।

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कोरोनल मास इजेक्शन खतरनाक कैसे?
सूर्य की सतह पर विकिरण के शक्तिशाली विस्फोट से बने ये सोलर फ्लेयर्स अस्थायी रूप से संचार और नेविगेशन ब्लैकआउट का कारण बन सकते हैं। इससे बिजली लाइने ट्रिप होकर काम करना बंद कर सकती हैं। जिससे पूरी दुनिया के कई हिस्सों में बिजली का प्रवाह रुक जाएगा। नासा ने आगे कहा कि राहत की बात है कि सौर वेधशालाओं का हमारा जाल अंतरिक्ष मौसम के इन आकर्षक घटकों को ट्रैक करने में हमारी सहायता करता है⁣। इसी कारण पृथ्वी पर व्यवधान बिलकुल ही कम है।

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सौर तूफान भी कम खतरनाक नहीं
सूरज की सतह से पैदा हुए सौर तूफान भी कम खतरनाक नहीं होते हैं। सौर तूफान के कारण धरती का बाहरी वायुमंडल गरमा सकता है जिसका सीधा असर सैटलाइट्स पर हो सकता है। इससे जीपीएस नैविगेशन, मोबाइल फोन सिग्नल और सैटलाइट टीवी में रुकावट पैदा हो सकती है। पावर लाइन्स में करंट तेज हो सकता है जिससे ट्रांसफॉर्मर भी उड़ सकते हैं। हालांकि, आमतौर पर ऐसा कम ही होता है क्योंकि धरती का चुंबकीय क्षेत्र इसके खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करता है।

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पृथ्वी का दक्षिणी हिस्सा होगा अधिक प्रभावित
स्पेस वेदर फिजिशिस्ट डॉ तमिथा स्कोव ने चेतावनी दी कि सूर्य के सतह पर विस्फोट से पैदा हुईं ये तरंगे पृथ्वी के दक्षिणी हिस्से को अधिक प्रभावित करेंगी। उन्होंने कहा कि नासा की भविष्यवाणियों से पता चलता है कि हाल ही में हुआ सूर्य का फिलामेंट विस्फोट 11 दिसंबर के अंत तक पृथ्वी के दक्षिण में एक चमकदार रोशनी बिखेर सकता है। इससे रेडियो और जीपीएस में भी हल्का व्यवधान आ सकता है।

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दक्षिण अफ्रीकी अंतरिक्ष एजेंसी ने भी जारी किया बयान
दक्षिण अफ़्रीकी राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी के खगोलविदों के मुताबिक, सूर्य के सतह पर दो कोरोनल मास इजेक्शन देखे गए हैं। इनसे निकलीं प्लाज्मा धरती की ओर बढ़ रही हैं। पहला सीएमई आज शाम 7 बजे के आसपास पृथ्वी पर पहुंचने की उम्मीद थी। इनमें से दूसरा इजेक्शन संभवत 11 दिसंबर को सुबह 10 बजे के आसपास संभावित कमजोर प्रभाव के साथ पृथ्वी से गुजरेगा।

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