राजनीति

आशीर्वाद की झड़ी और आक्रोश के बादल

– डॉ घनश्याम बटवाल (वरिष्ठ पत्रकार)

प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां चाल पकड़ गई है । प्रमुख दलों द्वारा यात्राओं के माध्यम से माहौल पक्ष में करने के जतन जारी हैं । दावा भाजपा और कांग्रेस दोनों ही कर रही है कि 150 प्लस इस बार । यह कहां तक बैठता है अंतिम चरण महत्वपूर्ण होगा । प्रत्याशियों पर भी बहुत कुछ निर्भर रहेगा। हर विधानसभा क्षेत्र में पक्ष और विपक्ष में दर्जनभर दावेदारी है।
राजी नाराजगी भी जोरों पर है और रहना है । इससे कैसे निपटेंगे दल ?

राजनीति के रथ पर सवार यात्राएं मध्य प्रदेश के गांव-शहर घूम रही हैं।भाजपा की जन आशीर्वाद यात्रा के जवाब में कांग्रेस ने जन आक्रोश यात्रा प्लान की है।’आशीर्वाद’ और ‘आक्रोश’ के चलते दोनों ही दलों ने सूचियां ठंडे बस्ते में डाल दी है।

चुनाव से तीन महीने पहले भाजपा नेतृत्व ने प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पहली सूची में 39 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए थे।पिछले चुनावों में हरल्ले प्रत्याशियों को इस सूची में जिताऊ मान कर शामिल करने से संबंधित क्षेत्रों के दावेदार हत्प्रभ-हताश-निराश-आक्रोशित हैं।इन क्षेत्रों में रुठों को मनाने मान मनौवल भी चल रही है। फ़ोकस 25 सितम्बर बाद रूठों को मनाने पर रहने का अनुमान है । लिस्टिंग तैयार है ।

इस पहली सूची के नेगेटिव इंपेक्ट का ही परिणाम है कि दूसरी सूची जारी करने से पहले केंद्रीय मंत्री अमित शाह मप्र के चुनाव संचालन प्रभारी नरेंद्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्रीशिवराज , प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी डी शर्मा आदि के साथ एकाधिक बार मंथन कर चुके हैं।दिल्ली में होने वाली इन बैठकों के बाद दावा किया जा रहा था कि बस अब दूसरी सूची की घोषणा हो जाएगी, लेकिन आज तक ऐसा नहीं हो पाया तो उसकी बड़ी वजह जन आशीर्वाद यात्रा भी है।
भारतीय जनता पार्टी की जन आशीर्वाद यात्राओं की शुरुआत 2 सितंबर से हुई है।इसके लिए भाजपा ने 7 रथों को तैयार किया । इनमें 5 रथ यात्रा में शामिल रहेंगे, जबकि दो रथ विपरीत परिस्थिति के लिए तैनात रहेंगे।ये जन आशीर्वाद यात्राएं 24 सितंबर को समाप्त होंगी।इन 22 दिन में पांचों यात्राएं प्रदेश में 10 हजार किलोमीटर का सफर तय किया ।। हर यात्रा 40-40 विधानसभा क्षेत्र को कवर करेगी।ग्वालियर-चंबल में ग्वालियर शहर, महाकौशल में जबलपुर, मालवा में उज्जैन, खंडवा-रीवा से एक साथ निकाली जा रही हैं।एक यात्रा इंदौर पहुंचने वाली है।यात्रा के समापन पर 25 सितंबर को भोपाल में 10 लाख कार्यकर्ताओं का महाकुंभ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री , संगठन और सरकार जुटे हुए हैं एकत्रीकरण के लिये । भारी मशक्कत होरही ।
मप्र के विभिन्न क्षेत्रों में केंद्रीय मंत्रियों और प्रदेश के मंत्री-नेता रथारूढ़ होकर घूम रहे हैं।भर बारिश में भीगते हुए ग्रामीणों-कार्यकर्ताओं से संवाद करते मुख्यमंत्री के फोटो आमजन को प्रभावित भी कर रहे हैं क्योंकि आशीर्वाद लेने निकले बाकी नेता ऐसा प्रयोग करने की उदारता दिखाने से हिचकिचाते रहे हैं। मुख्यमंत्री सहजता से खुले मन से और खुले मंच से जनता से रूबरू हुए । कई घोषणाएं भी की और वाह वाही बटोरी है इनके क्रियान्वयन में आसानी नहीं होगी यह ध्यान देने वाला विषय है ।
इस जन आशीर्वाद यात्रा का माहौल बनाए रखने के लिए ही संभवत: दूसरी सूची की घोषणा भाजपा नेतृत्व ने टाल दी है।वजह यह कि हर विधानसभा से आठ-दस घोषित दावेदार हैं और बाकी इनकी टांग खींचने वाले।सूची में नाम किसी एक का ही आना है तो बाकी दावेदार-समर्थक फिर आशीर्वाद यात्रा में क्यों वाहनों और कार्यकर्ताओं की भीड़ लेकर आएंगे।यही बड़ा कारण है कि दूसरी सूची की घोषणा टाली जा रही है। दूसरा कारण यह भी कि भाजपा खेमा कांग्रेस की पहली सूची घोषित होने का इंतजार भी कर रहा है ताकि यह पता चल सके कि किस क्षेत्र से कौन दमदार रहेगा

शिवराज-महाराज-नाराज इन तीन भागों में बंटी भाजपा के कौन कौन कांग्रेस में जा सकते हैं कांग्रेस की पहली सूची में भी संकेत मिल सकते हैं।केंद्रीय नेतृत्व मप्र के नेताओं से इसलिए भी नाखुश है कि पूर्व सीएम कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी, इंदौर भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष-पूर्व विधायक भंवर सिंह शेखावत जैसे मुसीबत के साथियों की नाराजी को पार्टी नेताओं ने गंभीरता से नहीं लिया, ऐसी ही नाराजी के स्वर अभी भी प्रदेश के मुख्य नगरों से उठ रहे हैं।दूसरी सूची घोषित करने पर यदि विद्रोह के हालात बने तो कांग्रेस को जन आक्रोश यात्रा में भाजपा के खिलाफ एक और बड़ा मुद्दा मिल जाएगा, इसलिए भी दूसरी सूची की घोषणा को टाला जा रहा है यह
हिंदुस्तान मेल संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा का असेसमेंट है ।

अब रही कांग्रेस की बात तो कांग्रेस 19 सितंबर गणेश चतुर्थी से जन आक्रोश यात्रा शुरु की । प्रदेश की 230 सीटों को कवर करने के लिए 7 यात्रा विभिन्न क्षेत्रों में निकाली जाएगी। भाजपा के खिलाफ चल रही सरकार विरोधी लहर का फायदा उठाने के लिहाज से यात्रा का खाका तैयार किया गया है।बीजेपी ने जहां अपनी जनआशीर्वाद यात्रा में क्षेत्रीय चेहरों को दरकिनार करते हुए केंद्रीय नेताओं को यात्रा की कमान सौंपी थी।इसे लेकर यह भी चर्चा है कि स्थानीय नेताओं को तरजीह नहीं देने से यात्रा को अब तक वैसा रिस्पॉन्स नहीं मिल पाया, जैसा उम्मीद कर रही थी।

जबकि मंदसौर में वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने दावा किया कि भरपूर समर्थन मिला है और 25 सितम्बर दीनदयाल जयंती पर भोपाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष इसका प्रगटीकरण होगा जब प्रदेश के 10 लाख से अधिक कार्यकर्ता जुटेंगे ।मंत्री श्री देवड़ा कहते हैं कांग्रेस की जनाक्रोश वाली बात पार्टी के अंदर के मतभेदों का प्रगटीकरण है जब पार्टी नेता ही आपस में गुथमगुथा होरहे हैं । यह बौखलाहट भी है
वहीं, कांग्रेस क्षेत्रीय नेताओं को मैदान में उतारकर, जनता को जमीनी मुद्दों पर चुनाव लड़ने का मैसेज देने की कोशिश करेगी।
हर यात्रा में कांग्रेस के दावेदार जनबल और संसाधनों के साथ शामिल रहें इसलिए कांग्रेस नेतृत्व भी अपनी पहली सूची यात्रा के समापन बाद या जिन क्षेत्रों से यात्रा गुजरती जाएगी वहां-वहां की सूची घोषित करती जाएगी।
ग्वालियर-चंबल संभाग में डॉ गोविंद सिंह 1600 किमी की, दूसरी यात्रा में अरुण यादव बुंदेलखंड क्षेत्र में 1700 किमी, तीसरी यात्रा में कमलेश्वर पटेल विध्य क्षेत्र के 1900 और अजय सिंह विंध्य के शेष बचे हिस्सों में 1400 किमी की चौथी यात्रा करेंगे।मध्य भारत क्षेत्र में सुरेश पचोरी 1400 किमी, कांतिलाल भूरिया 1700 किमी की छठी यात्रा और 1700 किमी की सातवीं यात्रा जीतू पटवारी करेंगे।

कांग्रेस इन सात जन आक्रोश यात्रा के बहाने भाजपा की जन आशीर्वाद यात्रा को फर्जी बताने के साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा अब तक की गई 3 हजार से अधिक घोषणाओं का फर्जीवाड़ा गांव-गांव बताने की प्लानिंग कर चुकी है।
कांग्रेस इस आक्रोश यात्रा में झूठी घोषणाओं का सच बताने के तहत गीत-पर्चे-पोस्टर आदि का भी सहारा लेगी। इसके साथ ही यह भी बताएगी कि जन कल्याणकारी योजनाओं के नाम पर जो धन लुटाया जा रहा है उसका भार टैक्स के रूप में करदाताओं को ही वहन करना है।भोपाल में पीसीसी चीफ कमलनाथ पहले ही कह चुके हैं कि प्रदेश की बदहाली और बर्बादी के खिलाफ 11400 किमी की जन आक्रोश यात्रा निकली है । प्रदेश के अन्य स्थानों के साथ मंदसौर से भी जनाक्रोश को लेकर कांग्रेस ने पूर्व मंत्री जीतू पटवारी के नेतृत्व में जोरदार आगाज़ किया है आज प्रदेश में राशन वितरण, खाद बीज में घोटाला, चारों तरफ घोटाले हो रहे हैं। मध्यप्रदेश की जनता अंधी नहीं है।
कांग्रेस तो 2018 में भी बढ़त लेकर सत्तारूढ़ हुई थी , पाला बदल से सरकार बदली ! अब 2023 आया है भाजपा को डर है कि कहीं फ़िर गच्चा नहीं खाजाएँ वहीं कांग्रेस की चिंता यह है कि जीत की नैया फ़िर डूब न जाये ? कमर कसकर दोनों दल हर गांव हर शहर दस्तक दे रहे हैं ।

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